कवर्धा (जिला ब्यूरो)। सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर धान खरीदी केंद्र रेगाखार खुर्द में सामने आया है। यहां धान तौल प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी और अनियमितता पाए जाने के आरोप किसानों द्वारा लगाए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि केंद्र में न तो पारदर्शी तौल हो रही है और न ही शासन द्वारा तय मापदंडों का पालन किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, धान तौल के दौरान कांटे में कम वजन दिखाना, बार-बार वजन काटना, मैनुअल हस्तक्षेप और तौल पर्ची में हेराफेरी जैसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कई किसानों का आरोप है कि एक-एक बोरी में 2 से 3 किलो तक धान कम तौला जा रहा है, जिससे उन्हें सीधे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों का फूटा गुस्सा
धान बेचने आए किसानों ने बताया कि जब वे तौल में गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाते हैं तो उन्हें टालमटोल जवाब दिया जाता है। कुछ किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र में कार्यरत जिम्मेदार कर्मचारी और समिति प्रबंधन मिलकर नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं।
भुगतान और रिकॉर्ड में भी संदेह
सिर्फ तौल ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन एंट्री, भुगतान प्रक्रिया और रिकॉर्ड संधारण में भी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि कई मामलों में वास्तविक तौल और पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों में अंतर पाया गया है, जो बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद अब तक जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या इस पूरे मामले में ऊपर तक मिलीभगत है या फिर शिकायतों को जानबूझकर दबाया जा रहा है।
जांच की मांग
किसानों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि धान खरीदी केंद्र रंगरेगाखार खुर्द में
- तौल कांटों की तत्काल जांच,
- सीसीटीवी फुटेज की जांच,
- पिछले दिनों की तौल पर्चियों और ऑनलाइन रिकॉर्ड का मिलान,
दोषी कर्मचारियों और समिति प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो किसानों ने आंदोलन और उच्चस्तरीय शिकायत की चेतावनी भी दी है।

