नीरज शर्मा संवाददाता दैनिक छत्तीसगढ़ वॉच शिवरीनारायण ✍️
शिवरीनारायण। नगर में सोमवार को पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ गौरा-गौरी विवाह एवं बरात स्वागत के भव्य आयोजन संपन्न हुए। ग्राम की मुख्य चौपाल से निकली गौरा-गौरी की शोभायात्रा में ढोल-नगाड़े, बाजे-गाजे और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुन पर महिलाएं और युवा झूमते हुए चल रहे थे। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर बरात का स्वागत किया, वहीं ग्रामीणों द्वारा नृत्य-गान से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
शोभायात्रा के मुख्य स्थल पर पहुंचने पर गौरा-गौरी की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। सुहागिन महिलाओं ने अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए गौरा-गौरी की महापूजा में हिस्सा लिया।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने कठोर तप कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। उनके तप और विवाह की स्मृति में गौरा-गौरी पूजा का विधान है। इसी परंपरा के चलते विवाह पश्चात माता गौरा मायके आती हैं और अगले दिन गौरा-गौरी का प्रतीकात्मक ‘विदाई’ एवं ‘बरात’ का आयोजन होता है, जो दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
भक्ति और परंपरा का संगम
पूरे आयोजन में महिलाओं ने पारंपरिक गीत— “गौरा के बाड़े आज बरात आय रे…”, “जवांरिन गऊरी, खेलें फाग…”,—गाकर उत्सव को और दिव्य रूप दिया।
गौरा-गौरी के इस पारंपरिक उत्सव ने न सिर्फ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित किया, बल्कि समाज में सौहार्द और एकता का अद्भुत संदेश भी दिया।
