मुस्तफाबाद हादसे के बाद एक्शन में सरकार : दिल्ली की 15 खतरनाक इमारतों की पहचान, JE का तबादला और एक अधिकारी बर्खास्त

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नई दिल्ली। मुस्तफाबाद के दयालपुर इलाके में चार मंजिला इमारत गिरने से हुई 11 लोगों की मौत में निगमायुक्त अश्वनी कुमार की सख्ती के बाद कार्रवाई शुरू हो गई है। रविवार को जहां खतरनाक और पांच से छह मंजिल ऊंची इमारतों की पहचान का सर्वे शुरू हो गया है तो वहीं वार्ड के कनिष्ठ अभियंता(जेई) रवि कुमार सिंह का तबादला कर बिल्डिंग विभाग से हटाकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है । वहीं, एक जेई फैजान रजा को बर्खास्त कर दिया गया है।

निगम के अनुसार सर्वे में 15 खतरनाक इमारतों की पहचान की है और सर्वे सोमवार को भी जारी रहेगा। निगम के अनुसार इन इमारतों का ढांचा ऐसा है कि वह भार सहन करने के लिए सक्षम नहीं है और जानमाल का नुकसान हो सकता है।

निष्पक्ष जांच के लिए कारण बताओ नोटिस जारी

निगम ने अपने जारी बयान में बताया कि चूंकि वर्तमान जेई रवि कुमार सिंह 28 नवंबर 2024 से ही वार्ड में तैनात थे इसलिए उन्हें जोन से हटाकर दूसरे विंग में तैनात किया गया है और निष्पक्ष जांच के लिए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसी नेहरू विहार वार्ड में मार्च 2019 से अगस्त 2021 तक तैनात एक अन्य जेई फैजान रजा को बर्खास्त इसलिए किया गया है कि वह पहले से ही कई अनुशासनात्क कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। उन्हें ऐसे ही एक मामले में नौकरी से हटा दिया गया है। निगम ने यह भी बताया कि बिल्डिंग विभाग में तैनात तीन और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उनको या तो जबरन सेवानिवृत किया जाएगा या फिर नौकरी से बर्खास्त किया जाएगा।

एक इमारत को अवैध निर्माण के चलते सील किया

वहीं, निगम ने घटना वाले इलाके में एक इमारत को अवैध निर्माण के चलते सील किया है। इसमें दो दुकानें और तीन आवसीय परिसरों को सील कर दिया है। एक अवैध निर्माण ध्वस्त करने की प्रक्रिया भी चल रही है। एमसीडी अधिकारियों के अनुसार नेहरू विहार वार्ड में सर्वे किया जा रहा है। क्योंकि यह एक घनी आबादी वाला क्षेत्र हैं। यहां पर इतनी बड़ी संख्या में अवैध निर्माण कैसे हो गया है इसमें विस्तृत जांच की आवश्यकता है।

पूरी दिल्ली में बन रही हैं पांच से छह मंजिल की इमारतें

मुस्तफाबाद की घटना के बाद नेहरू विहार इलाके में ही पांच से छह मंजिल ऊंची खतरनाक इमारतों का सर्वे किया जा रहा है। उन इमारतों की पहचान की जा रही है जिनमें भार सहने की क्षमता नहीं है लेकिन, दिल्ली में नेहरू विहार ही नहीं करावल नगर, सीलमपुर, सीमापुरी, नंदनगरी, शाहदरा, मंडावली, गांधी नगर, भजनपुरा, त्रिलोकपुरी, लक्ष्मी नगर, पांडव नगर, उत्तम नगर, बुराड़ी, किराड़ी, पालम, बवाना, नरेला, सुल्तानपुरी, मगोलपुरी में यही हाल है। जिसकी प्रमुख वजह आवासीय मांग का एजेंसियों द्वारा पूर्ति न कर पाना भी है। जितनी बड़ी संख्या में लोग दिल्ली में आते हैं उनके के लिए आवासीय व्यवस्था सरकारी तौर पर उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए अनधिकृत कॉलोनियां बस रही हैं।

भूतल पर है पार्किंग तो 17.5 मीटर ऊंची हो सकती है इमारत

दिल्ली में रिहायशी प्लाट की ऊंचाई अधिकतम 15 मीटर हो सकती है लेकिन दिल्ली में 20-22 मीटर ऊंची इमारतें आसानी से दिख जाएगी। हालांकि कुछ शर्तों में इमारत की ऊंचाई को लेकर छूट दी जाती है। इसमें भूतल पर अगर पार्किंग बनी है तो इसका लाभ संपत्ति मालिक को दिया जाता है। ऐसे में संपत्ति मालिक अपनी संपत्ति को 17.5 मीटर तक बना सकता है।

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