Even six years after being incorporated into the municipal corporation, the ward remains in a dilapidated state; tax collection continues, yet basic amenities are nowhere to be found.
बिलासपुर। नगर निगम सीमा में शामिल हुए नए क्षेत्रों को छह साल से अधिक का समय बीत चुका है। ग्राम पंचायत और नगर पंचायत से निगम का हिस्सा बने इन वार्डों के लोगों को उम्मीद थी कि अब उनके क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज होगी और उन्हें भी शहर जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। लेकिन, छह साल बाद भी ये उम्मीदें पूरी तरह से खोखली साबित हो रही हैं।
हालात यह हैं कि आज भी इन क्षेत्रों के रहवासी पक्की सड़क, स्वच्छ पेयजल, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे हैं। निगम प्रशासन इन क्षेत्रों से नियमित रूप से टैक्स की वसूली तो कर रहा है, लेकिन विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ अनदेखी की जा रही है।
सबसे ज्यादा परेशानी शहर से लगे उन बाहरी इलाकों में है, जहां तेजी से बड़ी-बड़ी कॉलोनियां और बस्तियां विकसित हो गई हैं। नगर निगम टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसी) से स्वीकृति न होने का हवाला देकर इन क्षेत्रों में आवश्यक विकास कार्य कराने से पल्ला झाड़ रहा है। स्थिति यह है कि टैक्स देने के बावजूद लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। पिछले एक महीने से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने इन इलाकों की सूरत और भी बिगाड़ दी है।
पक्की सड़कों के अभाव में कच्ची सड़कों पर बने बड़े-बड़े गड्ढों में लबालब पानी भर गया है, जिससे पूरा इलाका कीचड़ में तब्दील हो गया है। वाहन चालकों और पैदल राहगीरों का घर से निकलना दूभर हो गया है। इसके अलावा, कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था न होने के कारण रात के अंधेरे में दुर्घटनाओं का खतरा भी काफी बढ़ गया है।
स्थानीय जनप्रतिनिधि महाबली कोशले और वार्ड के रहवासियों का कहना है कि वे लगातार नगर निगम अधिकारियों को इन गंभीर समस्याओं से अवगत करा रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। जनता की मांग है कि यदि बारिश के कारण अभी पक्की सड़क का निर्माण संभव नहीं है, तो कम से कम गड्ढों में मुरुम या गिट्टी डालकर अस्थायी मरम्मत कराई जाए ताकि आवागमन सुगम हो सके। वहीं, इस पूरे मामले में नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे का कहना है कि सभी जोन कार्यालयों को उनके क्षेत्र के वार्डों के लिए पर्याप्त राशि आवंटित कर दी गई है और आवश्यकता के अनुसार तुरंत कार्य कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि बारिश का आधा मौसम बीत जाने के बाद भी अधिकांश क्षेत्रों में निगम के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं, जिससे निगम प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली को लेकर आम जनता में भारी आक्रोश पनप रहा है।]
