बिजली दरों में वृद्धि के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार बताकर डॉ. रमन ने अपनी नासमझी उजागर कर दी कांग्रेस

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15 वर्षों तक मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री रहने के बाद भी बिजली दरें तय करने की प्रक्रिया की समझ नहीं
00 केंद्र की नीतियों और कार्यप्रणाली के कारण विगत 8 वर्षों से देश में कोयला संकट

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने कहा कि बिजली दरों में वृद्धि के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार बताकर डॉ. रमन सिंह ने अपनी नासमझी उजागर कर दी है। उन्होंने राज्य में बिजली की दरों में वृद्धि के लिए राज्य सरकार को उत्तरदायी बताया है, जिससे यह स्पष्ट है कि 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर रहने के बाद भी उन्हें बिजली दरें तय करने की प्रक्रिया की समझ नहीं है। कांग्रेस ने कहा है कि वास्तव में केंद्र की नीतियों एवं कार्यप्रणाली के कारण ही विगत 8 वर्षों में देश में कोयला संकट की स्थिति निर्मित हुई है।
आर.पी.ने कहा कि देश में विद्यमान कोयला संकट की पृष्ठभूमि को जानना आवश्यक है। वर्ष 2012-13 में भाजपा ने पूरे देश में यह दुष्प्रचार किया कि विगत 20 वर्षों में कोयला ब्लॉकों के आवंटन में 10.67 लाख करोड़ का घोटाला हुआ है। घोटाले के झूठ को इतना प्रचारित प्रसारित किया गया कि सुप्रीम कोर्ट को वर्ष 2014 में विगत 20 वर्षों में आबंटित सभी कोल ब्लॉकों के आबंटन को निरस्त करने के लिए विवश होना पड़ा। यहां तक कि कोयला उत्पादन कर रही खदानों के आबंटन को भी निरस्त कर दिया गया, स्वाभाविक था कि 2014 से ही इस देश में कोयला संकट की स्थिति की शुरुआत हो चुकी थी। वर्ष 2014 से केंद्र में भाजपा की सरकार है। केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में निरस्त हुए कोल ब्लाक के पुन: खुली निविदा के माध्यम से आबंटन हेतु हर संभव प्रयास किए गए किंतु इससे भी कोयले की आपूर्ति में आवश्यक सुधार नहीं हो सका। भाजपा के नेतागण कृपया यह जानकारी देवें कि कोल ब्लाकों की नीलामी कर 10.76 लाख करोड़ में से कितनी राशि मिल चुकी है तथा यह भी बताएं कि एक साथ सभी खदानों के आबंटन से देश को कितना आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि वास्तव में केंद्र की नीतियों एवं कार्यप्रणाली के कारण ही विगत 8 वर्षों में देश में कोयला संकट की स्थिति निर्मित हुई है। विवशता में केंद्र सरकार द्वारा सभी ताप विद्युत इकाइयों हेतु आयतित कोयले के उपयोग करने के निर्देश जारी किए गए। केंद्र सरकार का कोयला आयात करने का निर्णय भी अनेक संदेह उत्पन्न करता है, क्योंकि केंद्र सरकार के प्रिय औद्योगिक घराने ने हाल ही में विदेशों में कोयले की खदानें ली हैं तथा देश में कोयले का आयात आरंभ किया गया है। एनटीपीसी द्वारा इसी औद्योगिक घराने से आयातित कोयले को अत्यधिक महंगी दरों पर खरीदा गया है। इसके कारण एनटीपीसी द्वारा राज्य में उत्पादित होने वाली विद्युत की दरों में वृद्धि की गई है। चूंकि राज्य सरकार का एनटीपीसी के साथ विद्युत क्रय कर दीर्घ अवधि का अनुबंध है, इसलिए राज्य विद्युत मंडल को विवश होकर बढ़ी हुई कीमतों का भार उपभोक्ताओं पर डालना पड़ रहा है।

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