congress पदाधिकारी ने प्रशासन से मांगी आत्मदाह की अनुमति, जानिए क्या है पूरा मामला

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सूरजपुर। जल जंगल जमीन की लड़ाई छत्तीसगढ़ के लिए कोई नया मुद्दा नही है। अक्सर यहाँ इन मुद्दों पर आंदोलन होना एक आम सी बात रही है भू माफियाओं से गरीबों की जमीन बचाने के लिए वक़्त वक़्त पर राज्य सरकारों ने कानून में संशोधन भी किये है,,,, लेकिन उसके बावजूद छतीसगढ़ में ऐसे कई मामले सामने आये है जहां किसानों की जमीनों का फर्जी दस्तावेज तैयार कर या तो बेच दिया गया या उस पर कब्जा कर लिया गया ,,,ऐसा ही एक मामला सूरजपुर के ग्राम चांचीडाँड़ से सामने आया है जहाँ कांग्रेस के पदाधिकारी ने पटवारी पर फर्जी तरीके से शासकीय भूमि निजीकरण करने का आरोप लगाया है,,,जिसके बाद शिकायत पर कार्यवाही न होने पर अब मुख्यमंत्री आमसभा के स्थल में परिवार के साथ आत्मदाह करने की जिला कलेक्टर से अनुमति मांगी है,,,,

तस्वीरों में नजर आ रहा शक्स कोई और नहीं कथित तौर पर कांग्रेस का कार्यकर्ता है. जिसका आरोप है की बीते 4 वर्षों से वह कार्यालय के चक्कर लगा रहा हैं पर उनकी सुनने वाला कोई नहीं ,,, उनकी निजी जमीन के पास शासकीय भूमि थी जिसको पटवारी के द्वारा निजी भूमि में स्थानांतरित कर दिया गया है,,,, जिसकी वजह से अब उसके सामने अपनी जमीन तक पहुंचने के लिए कोई मार्ग नहीं बचा है,,,दूधनाथ यादव है जो खुद कांग्रेस कमेटी का एक सक्रिय कार्यकर्ता है ,,, अब खुद अपनी ही पार्टी की सरकार के सामने आत्मदाह करने की अनुमति जिला कलेक्टर के माध्यम से मांग रहा है,,,,

आवेदन देने वाले व्यक्ति से बात कर मामले का किया जाएगा निराकरण

मुख्यमंत्री के विधानसभा वार दौरे को लेकर प्रशासन ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है. जिले की नवपदस्थ कलेक्टर इफ्फत आरा ने बताया कि जहां मुख्यमंत्री प्रशासनिक अधोसंरचना की जानकारी लेंगे वहीं जनचौपाल के माध्यम से लोगो की समस्याओं से भी रूबरू होंगे. वहीं आत्मदाह की अनुमति मांगने वाले आवेदन पर उन्होंने यह कहा कि मामला अभी संज्ञान में आया है. आवेदन देने वाले व्यक्ति से बात कर मामले का निराकरण किया जाएगा ।

 

6 मई से 8 मई तक प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल सूरजपुर प्रवास पर पहुँच रहे है ,,,, ऐसे में प्रशासन पूरी जदोजहद में लगा है कि मुख्यमंत्री के सामने ऐसी कोई गम्भीर समस्या न आये जो उनके गले की फांस साबित हो। लेकिन इस तरह के एक कांग्रेस पदाधिकारी के द्वारा सभा स्थल पर आत्मदाह की अनुमति की मांग ने प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीर खिंच दी है बहरहाल अब देखने वाली बात होगी कि कल से शुरुआत हो रहे मुख्यमंत्री के दौरे में ऐसे और कितनी जनसरोकार से जुड़ी समस्याएं सामने आती है और प्रशासन उन पर क्या त्वरित कार्यवाही करता है ।

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