CG HIGH COURT : Child care leave cannot be stopped citing staff shortage
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि स्टाफ की कमी या प्रशासनिक दिक्कत का बहाना बनाकर किसी महिला कर्मचारी को चाइल्ड केयर लीव से वंचित नहीं किया जा सकता। यह उसका वैधानिक अधिकार है और इसे रोका नहीं जा सकता।
मामला बिलासपुर सेंट्रल जेल में पदस्थ एक महिला वार्डर का है। उन्होंने जुड़वां बच्चों की देखभाल के लिए पहले 90 दिन की चाइल्ड केयर लीव ली थी। इसके बाद बच्चों की कम उम्र को देखते हुए उन्होंने 60 दिन की अतिरिक्त छुट्टी मांगी, लेकिन जेल प्रशासन ने कर्मचारियों की कमी का हवाला देकर आवेदन खारिज कर दिया।
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महिला वार्डर ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (छुट्टी) नियम, 2010 के तहत महिला कर्मचारियों को पूरे सेवाकाल में 730 दिन तक चाइल्ड केयर लीव का अधिकार है। उन्होंने अब तक केवल 90 दिन की छुट्टी का ही उपयोग किया था।
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि बिलासपुर सेंट्रल जेल में महिला वार्डरों की कमी है। स्वीकृत पदों के मुकाबले कई पद खाली हैं, इसलिए सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से अतिरिक्त अवकाश देना संभव नहीं था।
लेकिन जस्टिस बीडी गुरु ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि चाइल्ड केयर लीव का उद्देश्य छोटे बच्चों की देखभाल के लिए मां को पर्याप्त समय देना है। यदि कर्मचारी नियमों के तहत पात्र है, तो स्टाफ की कमी का बहाना बनाकर उसका अधिकार नहीं छीना जा सकता।
हाईकोर्ट ने जेल प्रशासन का आदेश रद्द करते हुए निर्देश दिया कि 7 दिनों के भीतर महिला वार्डर को 60 दिन की अतिरिक्त चाइल्ड केयर लीव मंजूर की जाए। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि कर्मचारियों की कमी दूर करना नियोक्ता की जिम्मेदारी है, न कि उसका बोझ कर्मचारी पर डाला जाए।
