CHHATTISGARH : High Court strict on religious law!
रायपुर। छत्तीसगढ़ के नए धर्म स्वातंत्र्य कानून को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट ने बड़ा संकेत दिया है। कानून के क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाने की मांग वाली याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान खुद ही केस वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसके बाद कोर्ट ने इसे बिना किसी भविष्य की कानूनी स्वतंत्रता के खारिज कर दिया।
भिलाई निवासी मोसेस लोगन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026’ के लागू होने और उसके प्रवर्तन पर एकतरफा अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी। लेकिन सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने साफ कहा कि इसी मुद्दे पर पहले भी दो याचिकाएं दायर हो चुकी हैं और दोनों को अदालत समयपूर्व मानते हुए खारिज कर चुकी है।
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महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने कोर्ट को बताया कि 24 अप्रैल और 8 मई 2026 को इसी डिवीजन बेंच ने समान मामलों को पहले ही निरस्त कर दिया था। ऐसे में यह तीसरी याचिका भी कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है।
राज्य के इस रुख के बाद याचिकाकर्ता के वकील ने मामले को आगे बढ़ाने के बजाय याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। इस पर कोई आपत्ति नहीं जताते हुए कोर्ट ने मामले को समाप्त कर दिया।
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मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि याचिका को बिना किसी आगामी विधिक स्वतंत्रता के वापस लेते हुए खारिज किया जाता है। यानी इसी मुद्दे पर दोबारा वही याचिका दाखिल करने का रास्ता भी बंद हो गया है।
