CHHATTISGARH: Supreme Court reprimands Chhattisgarh government
रायपुर डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। अदालत ने विशेष शिक्षकों के खाली पदों को लेकर नाराजगी जताते हुए पूछा कि दिव्यांग छात्रों की शिक्षा को लेकर इतनी लापरवाही क्यों बरती जा रही है। कोर्ट ने साफ कहा कि समावेशी शिक्षा व्यवस्था में देरी अब स्वीकार नहीं की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिलना चाहिए और लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरना सरकार की जिम्मेदारी है। मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2026 में होगी।
दो महीने में भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया दो माह के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य शासन से कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और अनुपालन रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की जाए।
“राजनीश कुमार पांडेय बनाम भारत संघ” मामले में सुनवाई
यह आदेश “राजनीश कुमार पांडेय एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य” मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। अदालत ने कहा कि दिव्यांग बच्चों की शिक्षा केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता बेहद जरूरी है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राज्य में बड़ी संख्या में पद खाली हैं, जबकि कई योग्य शिक्षक वर्षों से संविदा और मानदेय पर काम कर रहे हैं। इस पर अदालत ने गंभीर चिंता जताई।

