CG BREAKING : सूर्यकांत तिवारी समेत 4 आरोपियों के नार्को टेस्ट की मांग खारिज

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CG BREAKING: Demand for narco test of 4 accused including Suryakant Tiwari rejected

रायपुर। छत्तीसगढ़ कोल घोटाले मामले में सूर्यकांत तिवारी समेत 4 आरोपियों के नार्को टेस्ट को लेकर ACB-EOW की ओर से लगाए गए आवेदन पर स्पेशल कोर्ट में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों के तर्क को सुनने के बाद कोर्ट ने ACB-EOW के आवेदन को खारिज कर दिया है।

इन आरोपियों के नार्को टेस्ट की मांग –

सूर्यकांत तिवारी (कोल घोटाले का किंगपिन कहा जाता है)
रजनीकांत तिवारी (सूर्यकांत का भाई)
निखिल चंद्राकर (सूर्यकांत के साथ काम करता था)
रोशन कुमार सिंह ( कोयला घोटाले के सिंडिकेट में शामिल)

अब जानिए क्या है नार्को टेस्ट, जो लाता है सच सामने –

आरोपी खुद को बचाने के लिए अक्सर झूठी कहानी बनाता है। पुलिस को गुमराह करते हैं। इनसे सच उगलवाने के लिए नार्को टेस्ट किया जाता है। नार्को टेस्ट में साइकोएस्टिव दवाई दी जाती है। जिसे ट्रुथ ड्रग भी कहते हैं। जैसे कि सोडियम पेंटोथल, स्कोपोलामाइन और सोडियम अमाइटल।

नार्को टेस्ट व्यक्ति को सम्मोहन की स्थिति में ले जाता है और व्यक्ति जानकारी देने से पहले सोचने-समझने की स्थिति में नहीं रहता है। सोडियम पेंटोथल कम समय में तेजी से काम करने वाला एनेस्थेटिक ड्रग है। इसका इस्तेमाल सर्जरी के दौरान बेहोश करने में सबसे ज्यादा होता है। ये केमिकल जैसे ही नसों में उतरता है, शख्स बेहोशी में चला जाता है। बेहोशी से उठने के बाद भी आरोपी को पूरा होश नहीं रहता।

दावा है कि, इस हालत में आरोपी जानबूझकर कहानी नहीं गढ़ सकता, इसलिए सच बोलता है। नार्को टेस्ट में जो ड्रग दिया जाता है, वो बेहद खतरनाक होता है। जरा सी चूक से मौत भी हो सकती है या आरोपी कोमा में भी जा सकता है। यही वजह है कि नार्को टेस्ट से पहले आरोपी की मेडिकल जांच की जाती है।

इनका नहीं होता नार्को टेस्ट –

अगर आरोपी को मनोवैज्ञानिक, आर्गन से जुड़ी या कैंसर जैसी कोई बड़ी बीमारी है, तो उसका नार्को टेस्ट नहीं किया जाता। नार्को टेस्ट अस्पताल में इसलिए कराया जाता है, ताकि कुछ गड़बड़ होने पर इमरजेंसी की स्थिति में तत्काल इलाज किया जा सके। व्यक्ति की सेहत, उम्र और जेंडर के हिसाब से नार्को टेस्ट की दवाइयां दी जाती है।

कोल लेवी मामले में रायपुर सेंट्रल जेल में बंद कारोबारी सूर्यकांत तिवारी ने छत्तीसगढ़ ACB चीफ अमरेश मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए थे। उसने कहा है कि, जेल अधीक्षक के चैंबर में ACB चीफ ने बुलाकर धमकी दी। दबाव बनाया कि, सौम्या चौरसिया के जरिए भूपेश बघेल को पैसा देने की बात कबूल करूं।

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