SME GROWTH FUND : Big announcement for businessmen, what will change now?
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने छोटे और मझोले कारोबारियों के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में 10 हजार करोड़ रुपये के SME ग्रोथ फंड को मंजूरी दी गई है। इसका मकसद ग्रोथ-स्टेज पर पहुंच चुकी छोटी और मध्यम कंपनियों को कारोबार बढ़ाने के लिए जरूरी पूंजी उपलब्ध कराना है।
NEW AIR MARSHAL : वायुसेना को मिला नया मुखिया
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार की ओर से SME ग्रोथ फंड में 10 हजार करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता की गई है। इस फंड के जरिए छोटे और मध्यम उद्योगों में सीधे इक्विटी निवेश किया जाएगा।
इन कंपनियों को मिलेगा फायदा
सरकार का फोकस खास तौर पर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और टियर-2 व टियर-3 शहरों के औद्योगिक क्लस्टर्स पर रहेगा। लंबे समय के इक्विटी रिस्क कैपिटल की कमी से जूझ रही कंपनियों को इस फंड से कारोबार विस्तार में मदद मिल सकती है।
फंड के जरिए कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए पूंजी जुटा सकेंगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे भारतीय छोटे और मध्यम उद्योगों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मौजूदगी भी मजबूत होगी।
लॉजिस्टिक्स सिस्टम में भी बड़ा बदलाव
कैबिनेट ने देश के ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सिस्टम को ज्यादा एकीकृत बनाने के लिए इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी (ITLA) के गठन को भी मंजूरी दी है।
ITLA को परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े मामलों में रिसर्च, प्लानिंग, मॉनिटरिंग और नीतिगत सहयोग के लिए राष्ट्रीय स्तर की शीर्ष संस्था के तौर पर विकसित किया जाएगा।
इसके दायरे में सड़क, रेलवे, पत्तन, नागरिक उड्डयन और शहरी परिवहन जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। संस्था 10 साल या उससे ज्यादा की अवधि को ध्यान में रखते हुए व्यापक राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान तैयार करेगी।
500 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट पर भी नजर
ITLA की एक अहम जिम्मेदारी 500 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा लागत वाली इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की तकनीकी जांच करना होगी।
इसके साथ ही अलग-अलग डिजिटल स्रोतों से ट्रांसपोर्ट डेटा जुटाकर नेशनल ट्रांसपोर्ट डेटा रिपॉजिटरी (NTDR) तैयार की जाएगी। इसमें GSTN ई-वे बिल, FASTag और वाहन संबंधी डेटा जैसे स्रोतों का इस्तेमाल किया जाएगा।
इस डेटा से माल और यात्रियों की आवाजाही को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी और उसी आधार पर भविष्य की परिवहन योजना तैयार की जा सकेगी।
सरकार के मुताबिक, दोनों फैसलों का मकसद कारोबार को बढ़ावा देने के साथ देश में निवेश, आधुनिक तकनीक, मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूत करना है।
