BILASPUR: Treatment or extortion! Patient dies at Elite Medicity; handed a bill of ₹4.75 lakh for just 19 hours of treatment.
बिलासपुर। शहर के व्यापार विहार स्थित एलीट मेडसिटी हॉस्पिटल में इलाज के नाम पर मरीजों से मनमानी वसूली का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन पर मात्र 19 घंटे के इलाज के एवज में पौने पांच लाख रुपये का बिल थमाने का आरोप लगा है। मरीज की मौत के बाद जब परिजनों को यह भारी-भरकम बिल दिया गया, तो उनके होश उड़ गए। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लूट और मामले को रफा-दफा करने का दबाव बनाने का सीधा आरोप लगाया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गोड़पारा सुभाष नगर निवासी 55 वर्षीय संजय मिश्रा को सीने में तकलीफ के चलते 28 जुलाई की दोपहर करीब 3 बजे एलीट मेडसिटी में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान अगले दिन सुबह उनकी दुखद मृत्यु हो गई। परिजनों का कहना है कि मरीज महज 19 से 20 घंटे ही अस्पताल में भर्ती रहा, लेकिन इसके बावजूद प्रबंधन ने 4 लाख 75 हजार रुपये का बिल उनके हाथों में सौंप दिया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने इस अस्वाभाविक बिल का विरोध किया, तो अस्पताल प्रबंधन की ओर से बिल कम करने का प्रलोभन देकर उन पर मामले को दबाने का दबाव बनाया जाने लगा।
इस घटना के सामने आने के बाद शहर के नागरिकों और इंटरनेट मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी घटना सामने आने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक मामले में स्वतः संज्ञान नहीं लिया गया है। बिना औपचारिक शिकायत के विभागीय अधिकारियों की इस बेपरवाही से लोगों में भारी रोष व्याप्त है। आक्रोशित स्थानीय नागरिकों और परिजनों ने जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग से मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने तथा मनमानी करने वाले अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि आम जनता को इस तरह की कथित लूट से बचाया जा सके।
वहीं दूसरी ओर, अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। एलीट मेडसिटी हॉस्पिटल के डॉ. राजीव लोचन भोंगा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि जब मरीज को लाया गया था, तब उनकी स्थिति बेहद गंभीर थी और परिजनों ने उन्हें हर हाल में बचाने की गुहार लगाई थी। डॉ. भोंगा के मुताबिक, मरीज को बचाने के लिए अस्पताल का पूरा स्टाफ तैनात था और उन्हें हार्ट से संबंधित सभी महंगे और जरूरी ट्रीटमेंट दिए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इलाज की प्रक्रिया महंगी थी, लेकिन अस्पताल ने किसी भी प्रकार का गलत या मनमाना बिल नहीं बनाया है।
