BHUPESH BAGHEL CLAIM : भाजपा में आने का था इशारा, मना किया तो पड़े छापे …

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BHUPESH BAGHEL CLAIM : There was a hint of joining BJP, when he refused, raids were conducted…

रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक बड़ा राजनीतिक दावा किया है। सीनियर एडवोकेट और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के पॉडकास्ट ‘दिल से विद कपिल सिब्बल’ में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से उन्हें बातचीत के लिए बुलाया गया था। उनके मुताबिक, इन मुलाकातों के बाद कुछ ही दिनों में उनके यहां छापे पड़ने लगे।

भूपेश बघेल ने कहा कि शुरुआत में उन्हें समझ नहीं आया कि किस उद्देश्य से बुलाया जा रहा है। मुलाकात के दौरान उनसे पूछा जाता था कि उनके खिलाफ कौन-कौन से केस चल रहे हैं और किस तरह मदद की जा सकती है। उन्होंने कहा कि वे विपक्ष में हैं और सरकार की आलोचना करना उनका दायित्व है, इसलिए किसी तरह का कमिटमेंट नहीं दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री का दावा है कि हर मुलाकात के करीब आठ-दस दिन के भीतर उनके यहां एजेंसियों की कार्रवाई हो जाती थी। एक बार उन्होंने प्रधानमंत्री से फोन पर कहा भी कि मदद की बात कही गई थी, लेकिन छापा पड़ गया। इस पर उन्हें अधिकारियों से बात करने का आश्वासन मिला।

बघेल ने यह भी कहा कि सीधे तौर पर भाजपा में शामिल होने की बात नहीं कही गई, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि इशारा उसी दिशा में था। उन्होंने कहा कि जब वे कोई प्रतिबद्धता देकर नहीं लौटते थे, तो कुछ ही दिनों में फिर से छापे की कार्रवाई हो जाती थी।

चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी और जमानत

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 18 जुलाई 2025 को शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि कथित शराब घोटाले की रकम में से 16.70 करोड़ रुपए उन्हें मिले और इस राशि को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश किया गया। हालांकि, 2 जनवरी को हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिल चुकी है।

क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला?

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच ED और ACB कर रही है। FIR में 3200 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले का जिक्र है। जांच एजेंसियों के अनुसार, तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में कथित तौर पर एक सिंडिकेट के जरिए अवैध वसूली और गड़बड़ियां की गईं।

जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार घोटाले को तीन हिस्सों A, B और C कैटेगरी में अंजाम दिया गया –

A कैटेगरी : डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी कमीशन वसूली।

B कैटेगरी : नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से शराब की बिक्री और रिकॉर्ड में हेरफेर।

C कैटेगरी : डिस्टलरी के सप्लाई एरिया में बदलाव कर कथित अवैध वसूली।

जांच एजेंसियों का दावा है कि करोड़ों रुपए की अवैध उगाही और हेराफेरी के साक्ष्य मिले हैं। मामले में कई राजनेता, अधिकारी और कारोबारी नामजद हैं।

फिलहाल भूपेश बघेल के इन आरोपों पर भाजपा की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामला राजनीतिक रूप से गरमाने की संभावना है।

 

 

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