BHILAI PAVER BLOCKS CASE: 7 engineers get major relief from High Court
BHILAI PAVER BLOCKS CASE: नगर पालिका निगम भिलाई के अंतर्गत पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों में कथित भ्रष्टाचार के मामले में उच्च न्यायालय ने कलेक्टर दुर्ग द्वारा जारी निर्देश और मुख्य अभियंता द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस पर अंतरिम रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की एकलपीठ ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, कलेक्टर दुर्ग, निगम आयुक्त व अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
वर्ष 2023 एवं 2024 में नगर पालिका निगम भिलाई द्वारा आवश्यक प्रशासनिक व तकनीकी स्वीकृति के बाद विभिन्न सड़कों, फुटपाथों और चौराहों पर पेवर ब्लॉक लगाने के लिए ठेकेदारों को कार्य आदेश जारी किए गए थे। यह निर्माण कार्य निगम निधि और 15वें वित्त आयोग के अनुदान से कराए गए थे। कार्य पूर्ण होने पर सत्यापन के बाद ठेकेदारों को भुगतान भी कर दिया गया था।
हालांकि, परियोजना शाखा के अंतर्गत हुए इन कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर कलेक्टर दुर्ग के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग (PWD) और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के कार्यपालन अभियंताओं की संयुक्त टीम से जांच कराई गई।
जांच टीम की रिपोर्ट के अनुसार, 29 अनुबंधों में से 21 अनुबंधों में माप पुस्तिका (MB) में अधिक मात्रा दर्ज पाई गई, जबकि मौके पर कम कार्य हुआ था। रिपोर्ट में कुल ₹16,85,457/- का अधिक भुगतान दर्ज पाया गया।
इस प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर दुर्ग ने 3 सितंबर 2026 को पत्र जारी कर संबंधित अभियंताओं से राशि की वसूली और कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके परिपालन में मुख्य अभियंता, भिलाई निगम द्वारा उप अभियंता अर्पित बंजारे, चंदन निर्मल, श्वेता महेश्वर, पुरुषोत्तम सिंहा, रीमा हुमने, कृष्ण कुमार जंघेल तथा सहायक अभियंता श्वेता वर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था ।
कार्रवाई से व्यथित होकर अभियंताओं ने हाई कोर्ट अधिवक्ता सिबाशीष मिश्रा के माध्यम से याचिका दाखिल की। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक ने पक्ष रखा।
प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: विभाग द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में याचिकाकर्ताओं को शामिल ही नहीं किया गया और न ही उनका पक्ष सुना गया।
पूर्व निर्धारित मानसिकता: कलेक्टर द्वारा जारी पत्र में पहले ही वसूली और कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्देश दे दिया गया था। ऐसे में बाद में जारी किया गया कारण बताओ नोटिस केवल एक औपचारिकता है, क्योंकि निर्णय पक्ष सुने बिना पहले ही लिया जा चुका था।
