KTUJM DEPUTATION CONTROVERSY : Deputation is over, yet why did the professor remain in the post?
रायपुर। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में एक प्रोफेसर की प्रतिनियुक्ति को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। डॉ. अभिषेक दुबे की प्रतिनियुक्ति समाप्त करने और उन्हें मूल विभाग में वापस भेजने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से कई बार पत्राचार किए जाने का मामला सामने आया है।
दस्तावेजों के मुताबिक, डॉ. अभिषेक दुबे सहायक प्राध्यापक (प्रबंधन) के पद पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी, निमोरा में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे। विश्वविद्यालय ने 18 मार्च 2026 को उनकी प्रतिनियुक्ति तत्काल समाप्त कर मूल विभाग में कार्यभार संभालने के लिए पत्र भेजा था। इसके बाद 28 मई 2026 को भी निर्धारित समयावधि में मूल पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए।

पत्र में राज्यपाल और कुलाधिपति के निर्देशों के साथ विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद के निर्णय का हवाला दिया गया। इसमें स्पष्ट किया गया कि प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद भी कार्यभार ग्रहण नहीं करने की स्थिति में विश्वविद्यालय में उनकी सेवा स्वतः समाप्त मानी जाएगी और सहायक प्राध्यापक (प्रबंधन) का पद रिक्त मानकर सीधी भर्ती की कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल यह है कि जब प्रतिनियुक्ति समाप्त करने के लिए बार-बार पत्र जारी हुए, तो आदेशों का पालन किस स्तर पर अटका रहा? विश्वविद्यालय के दस्तावेजों में इस मामले को लेकर राज्यपाल और कुलाधिपति के निर्देशों की अनदेखी पर नाराजगी भी दर्ज है।
मामला उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि शासन और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।


