सरकार के एक मंत्री के ओएसडी और एक सप्लायर-ठेकेदार के बीच मंत्री बंगले में ही कहा-सुनी हो गई। बात इतनी बढ़ी कि मारपीट की नौबत आ गई और दोनों एक-दूसरे को देख लेने की धमकी देने लगे। मामला बिगड़ता देख बंगले के स्टाफ के कुछ लोगों ने हस्तक्षेप किया और दोनों को शांत कराया।
बताते हैं कि ठेकेदार-सप्लायर कुछ नियमों में संशोधन चाहते थे। मंत्रीजी को इसमें कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन ओएसडी इसमें पेंच लगा रहे थे। इससे ठेकेदार-सप्लायर नाराज थे और आखिरकार बात बहस तक पहुंच गई। मंत्रीजी पहले से ही अपने विभागीय सचिव को लेकर परेशान बताए जा रहे हैं, ऐसे में ओएसडी ने एक और परेशानी खड़ी कर दी है।
फिलहाल मामला शांत करा दिया गया है। लेकिन बंगले की इस तकरार का असर आगे कहां तक जाता है, यह आने वाले दिनों में ही पता चलेगा।
बाढ़ ने खोली आपदा प्रबंधन की पोल
प्रदेश में तीन दिनों की बारिश ने बस्तर, रायपुर और दुर्ग संभाग में भारी नुकसान किया है। बारिश और बाढ़ के बीच कई इलाकों में प्रशासनिक तैयारियों को लेकर सवाल खड़े हुए। राजस्व और आपदा प्रबंधन का अमला कई प्रभावित क्षेत्रों में अपेक्षित सक्रियता के साथ नजर नहीं आया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि बाढ़ जैसी आपदा से निपटने के लिए शासन-प्रशासन की तैयारी कितनी पुख्ता थी।
दक्षिण छत्तीसगढ़ में डीप डिप्रेशन के चलते भारी बारिश की चेतावनी पहले ही जारी हो गई थी। ऐसे में प्रशासन के पास संवेदनशील और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को समय रहते सतर्क करने तथा जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी के लिए पर्याप्त समय था। इसके बावजूद बारिश के दौरान कई जगह हालात बिगड़ने के बाद राहत और बचाव की कवायद शुरू होती दिखाई दी।
गंगरेल समेत अन्य जलाशयों के गेट खुलने के बाद नवापारा सहित कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। कई घरों में पानी घुस गया और लोगों को छतों पर शरण लेनी पड़ी। इस दौरान प्रशासन की ओर से लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जाती रही। प्रभावित लोगों के लिए भोजन और पेयजल जैसी बुनियादी राहत व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें सामने आईं। इससे लोगों में नाराजगी दिखी।
बारिश और बाढ़ ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि मौसम विभाग की चेतावनी और संभावित खतरे की जानकारी पहले से उपलब्ध होने के बावजूद आपदा प्रबंधन की तैयारियां जमीन पर कितनी प्रभावी थीं। अलग-अलग इलाकों से सामने आई तस्वीरों ने राहत और बचाव व्यवस्था की कमियों को उजागर किया है।
पीएम आवास पर जंग जारी रहेगी
पीएम आवास योजना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के बीच हुई डिबेट की देशभर में चर्चा रही। डिबेट में दोनों तरफ से कई आंकड़े और तथ्य सामने आए, लेकिन लगता नहीं कि इससे विवाद खत्म होने वाला है। योजना को लेकर पिछली सरकार से जुड़े कुछ और कागजात देर-सबेर सामने आ सकते हैं। यानी पीएम आवास पर सियासी जंग अभी जारी रहने के संकेत हैं।
चर्चा है कि भूपेश सरकार ने पीएम आवास के मद में अपना अंशदान दे पाने में असमर्थता जताई थी और इसके लिए बाकायदा पत्र भी लिखा गया था। यह भी कहा जा रहा है कि पीएम आवास और पंचायत एवं ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं में करीब चार हजार करोड़ रुपए खर्च होना था, जो नहीं हो पाया। अब यदि इससे जुड़े दस्तावेज सामने आते हैं तो इस मुद्दे पर राजनीति और गरमा सकती है।
डिबेट से दोनों फायदे में
पीएम आवास योजना पर भूपेश बघेल और विजय शर्मा में किसे ज्यादा राजनीतिक फायदा हुआ, इस पर अलग-अलग राय हो सकती है। लेकिन इतना जरूर है कि डिबेट से दोनों नेताओं को राजनीतिक रूप से फायदा मिला। भूपेश बघेल ने डिबेट की चुनौती दी और विजय शर्मा ने उसे स्वीकार किया। चुनौती देने के बाद भूपेश पीछे नहीं हटे और उन्होंने डिबेट में विजय शर्मा को घेरने की पूरी कोशिश की। इससे उनके जुझारू तेवर का संदेश गया।
दूसरी ओर, पहली बार के विधायक और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने जिस अंदाज में आंकड़ों के जरिए पूर्व मुख्यमंत्री को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की, उसकी भी चर्चा है। पार्टी के शीर्ष स्तर पर भी उनके प्रदर्शन को लेकर प्रतिक्रिया हुई है। इससे भाजपा के भीतर विजय शर्मा का कद बढ़ने और उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता मजबूत होने की चर्चा है। कुल मिलाकर पीएम आवास पर हुई डिबेट में दोनों नेता अपने-अपने राजनीतिक हित साधने में सफल रहे और असली जंग अब दस्तावेजों के जरिए आगे बढ़ने के संकेत दे रही है।
भाई साहब आ रहे हैं..
संगठन में हुए ताजा फेरबदल के बाद भाजपा नेता अपने-अपने तरीके से इसका विश्लेषण कर रहे हैं। हालांकि फेरबदल राष्ट्रीय स्तर पर हुआ है, लेकिन प्रदेश में इसके समीकरण किसके पक्ष में बनेंगे, इसकी तलाश शुरू हो गई है। ज्यादातर नेताओं का मानना है कि 15 वर्षों तक राज करने वाले भाई साहब की इस फेरबदल में चली है। उनके सैकड़ों समर्थक खुश हैं। उन्हें लग रहा है कि अब अच्छे दिन आने वाले हैं। पिछले तीन साल से उपेक्षा का दंश झेल रहे इन नेताओं को भाई साहब से बड़ी उम्मीद है। माना जा रहा है कि उनकी रणनीति आने वाले दिनों में काम करेगी।
नई टीम के साथ मीटिंग..
भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ के छह नेताओं को तवज्जो देते हुए अलग-अलग जिम्मेदारियां दी हैं। कुछ और नेताओं को भी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है। सौरभ सिंह को झारखंड का सह प्रभारी, गोमती साय को गुजरात का सह प्रभारी, दीपक महस्के को सोशल मीडिया का इंचार्ज और महासमुंद सांसद चौधरी को महिला मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। कई नेताओं को सत्ता में भी भागीदारी दी गई है। नाराज चल रहे भाजपा के कई नेताओं को मोर्चों का प्रभारी बनाया गया है। इन नियुक्तियों के बाद प्रदेश भाजपा में नई और युवा टीम खड़ी होती नजर आ रही है। इस टीम के साथ आगामी दिनों में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और स्थानीय पदाधिकारियों की बैठक होने वाली है। इस बैठक में आगामी कार्ययोजना भी तैयार की जाएगी।
वैश्य समाज का दबदबा..
अंबिकापुर जिले में इन दिनों गजब का समीकरण चल रहा है। जिले में वैश्य समाज का दबदबा बढ़ता देख कई नेता परेशान हैं। अंबिकापुर के विधायक राजेश अग्रवाल हैं। एसपी भी राजेश अग्रवाल हैं। चर्चित एडिशनल एसपी भी इसी समाज से हैं। हाल में जिला पंचायत सीईओ को हटाकर नगर निगम कमिश्नर की जिम्मेदारी भी इसी समाज से जुड़े अधिकारी को दी गई है। तहसीलदार भी इसी समाज से हैं। मजे की बात ये है कि बड़े ठेकेदार भी इसी समाज के हैं। और तो और ठेकेदार, जिले के निर्माण दफ्तरों में अपनी पसंद के अफसरों की पोस्टिंग तक करा रहे हैं।शासन-प्रशासन और संगठन में बढ़ते दबदबे को लेकर अब जातिवाद के आरोप भी लगने लगे हैं। वहीं इसे लेकर तरह-तरह के किस्से भी बनाए जा रहे हैं।
सड़कों की दुर्दशा, ठेकेदार बेहाल, कोर्ट का संज्ञान
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहली बार प्रदेश की सड़कें इतनी खराब हालत में दिखाई दे रही हैं। भारी बारिश के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त है। कई सड़कें बंद हैं और ट्रेनों का संचालन तक स्थगित करना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में सड़कों की हालत को लेकर कोहराम मचने वाला है। पिछले सप्ताह ही हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए प्रदेश की 237 सड़कों के खराब होने की बात कही थी। कोर्ट के संज्ञान के बाद मंत्री और विभाग ने जल्द सुधार का आश्वासन दिया है। इस सप्ताह हुई बारिश के बाद प्रदेश में खराब सड़कों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। आने वाले दिनों में सड़कों की बदहाली को लेकर जोरदार राजनीति देखने को मिल सकती है।
इधर, भुगतान संकट से जूझ रहे ठेकेदार भी सड़क पर आंदोलन करने उतारू हैं। उल्लेखनीय है कि संगठन मंत्री पवन साय की गाड़ी इसी माह अंबिकापुर में फंसने के बाद से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
