UN Speech: Pakistan sharply rebuked for harping on the Kashmir issue!
UN SPEECH: भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने शहबाज शरीफ के प्रोपेगैंडा पर भारत ने राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए जवाब दिया है.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फ़र्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ‘आतंकवाद’ को बढ़ावा देता है.
उन्होंने कहा, “हमने जो बातें सुनीं, वे उन लोगों की तरफ़ से आईं जिनका लंबे समय से भेदभाव और नफ़रत का रिकॉर्ड रहा है. वे दिन में सुरक्षा की बात करने का दावा करते हैं, लेकिन रात में आतंकवाद करते हैं. इसी सभा में धार्मिक असहिष्णुता को लेकर उस शासन की तरफ़ से बातें कही गईं, जिसकी सबसे बड़ी ताक़त ईशनिंदा के क़ानून हैं.”
“दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है. कोई भी धार्मिक बातें दुनिया को गुमराह नहीं कर सकतीं. जम्मू-कश्मीर का भी ज़िक्र किया गया. यह मेरे देश का अभिन्न और अटूट हिस्सा है और हमेशा रहेगा. लेकिन अगर हमें कश्मीर की बात करनी ही है, तो हमारा ध्यान पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर की ओर होना चाहिए. वहाँ लंबे समय से हो रही बेवजह हत्याओं, हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने के बारे में पूछा जाना चाहिए.”
पेटल गहलोत ने कहा, “मुद्दे के केंद्र में पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही सीमा पार आतंकवाद की नीति है. हमने पिछले साल दिखाया था कि आतंकवादियों के पास भागने और छिपने की कोई जगह नहीं होगी. आतंकवाद से ख़ुद की रक्षा करने के हमारे अधिकार का इस्तेमाल आगे भी किया जाता रहेगा.”
उन्होंने कहा, “पाकिस्तान की ओर से हो रहे आतंकवाद के गंभीर नतीजे होंगे. हमें भरोसा है कि यह सभा पाकिस्तान और उसकी नीतियों को उसी रूप में देखेगी, जैसी वे वास्तव में हैं, न कि उस रूप में जैसा पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने झूठ बोलकर दिखाया है.”
पेटल ने कहा, “हर साल झूठ दोहराने से वह सच नहीं हो जाता. पाकिस्तान का आतंकवाद, धोखा और दोहरा रवैया न तो उसके लिए और न ही दुनिया के लिए फ़ायदेमंद होगा.”
गौरतलब है कि इससे पहले पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ़ ने कहा था कि वो सिंधु नदी के पानी को रोकने के किसी भी भारतीय प्रयास को ‘युद्ध की कार्रवाई’ (एक्ट ऑफ़ वॉर) मानेंगे.
साथ ही उन्होंने कहा, “कश्मीर पाकिस्तान की जुगुलर वेन (गले की नस) है और हमेशा रहेगा.”
