YASHWANT VARMA CASE : If cash was found at the minister’s house, would an FIR have been filed?
बिलासपुर. न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। राम जेठमलानी मेमोरियल लेक्चर के दौरान वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे और महेश जेठमलानी ने जस्टिस यशवंत वर्मा मामले का जिक्र करते हुए कई सवाल उठाए।
CG SNAKE BARAAT: ऋषि पंचमी पर निकली सांपों की अनोखी शोभा यात्रा!
महेश जेठमलानी ने मार्च 2025 में जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर कथित तौर पर कैश मिलने के मामले में FIR दर्ज नहीं होने पर सवाल किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
इसी मुद्दे पर हरीश साल्वे ने सवाल उठाया कि अगर ऐसी ही घटना किसी मंत्री के घर पर होती, तो क्या उसे FIR से राहत मिलती? अदालत का रुख क्या होता?
मामले पर CJI सूर्यकांत ने न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों से निपटने वाली मौजूदा न्यायिक व्यवस्था का बचाव किया। उन्होंने कहा कि व्यवस्था मजबूत और जवाबदेह है, हालांकि किसी भी सिस्टम में सुधार की गुंजाइश रहती है।
CJI ने यह भी कहा कि कई शिकायतें ऐसे लोगों की होती हैं जो कोर्ट का फैसला अपने खिलाफ आने के बाद नाराज होते हैं। ऐसे में हर शिकायत को सार्वजनिक करने के असर पर भी विचार करना जरूरी है।
CG SNAKE BITE FRAUD : डॉक्टर फरार, 40 PM रिपोर्ट अटकी!
बहस सिर्फ जस्टिस वर्मा मामले तक नहीं रुकी। साल्वे ने अदालत की निगरानी में होने वाली जांच पर सवाल उठाते हुए 2G स्पेक्ट्रम, कोयला ब्लॉक और हवाला मामलों का उदाहरण दिया। उनका तर्क था कि अदालत की निगरानी से जांच एजेंसी की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
वहीं जेठमलानी ने जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर प्रक्रिया में ज्यादा पारदर्शिता की जरूरत बताई। उन्होंने फेवरिटिज्म और भाई-भतीजावाद की आशंकाओं को दूर करने के लिए सुधार की मांग की।
CJI सूर्यकांत ने कॉलेजियम व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा कि नियुक्तियां और ट्रांसफर सरकार के साथ सलाह-मशविरा कर किए जाते हैं।
पूरी बहस का मूल सवाल यही रहा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखते हुए उसमें पारदर्शिता और जवाबदेही कैसे बढ़ाई जाए?
