रायपुर. समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन के पूर्व उच्च स्तरीय समिति द्वारा विस्तृत चर्चा एवं सुझाव के लिए दो दिवसीय बैठक सर्किट हाउस के सभाकक्ष में हुई। इसमें मसीही समाज के प्रतिनिधि मंडल ने समिति के अध्यक्ष श्री एम. के. राउत और सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार के समक्ष उन्होंने अपने सुझाव व मांगें रखीं।
पास्ट्रेट कोर्ट के अध्यक्ष जॉन राजेश पॉल, पास्टर्स फैलोशिप के अध्यक्ष पादरी राजेश गार्डिया, भिलाई छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फैलोशिप के अध्यक्ष एवं मेनोनाइट चर्च के पादरी राकेश प्रकाश, कोषाध्यक्ष सीसीएफपास्टर जेम्स लाल, कैथोलिक डायसिस के फादर जॉन पुन्नूर एवं फादर क्रोसलिन, मारथोमा चर्च के पूर्व सचिव मोहन सैमुएल, इंडियन ऑर्थोडाक्स चर्च के कोषाध्यक्ष शीबू जॉन, बिलिवर्स डायसिस के फादर संदीप लाल व फादर सुरेश पाइक, पास्टर आशीष गार्डिया । प्रतिनिधियों ने समान नागरिक संहिता में लिव-इन-रिलेशनशिप के एजेंडे को पृथक रखने की मांग की। उन्होंने इस संबंध में पूरे प्रदेश को सामाजक रूप से होने वाले नुकसान पर तर्क प्रस्तुत किए। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दाखिल करने का सुझाव दिया। प्रतिनिधियों ने कहा कि बाइबिल में विवाह सबसे पवित्र संस्कार माना गया है और तलाक का कोई स्थान नहीं है। इसके साथ ही प्रतिनिधियों ने मसीही विवाह की प्रक्रिया की भी विस्तार से जानकारी दी। मसीही समाज ने उच्च स्तरीय समिति से मांग की कि यूसीसी में मसीही धर्म, परंपराओं, मौलिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों को सुरक्षित रखने, संस्थाओं की रक्षा जाए। छत्तीसगढ़ के विकास में मसीही समाज के योगदान का भी उल्लेख किया। प्रतिनिधियों ने समिति द्वारा यूसीसी का ड्राफ्ट बनाए जाने के बाद एक बार फिर से सबको विचार विमर्श के लिए बुलाया जाए। इसके बाद ही राज्य सरकार को भेजा जाए।
प्रतिनिधियों ने गहन मंथन के दौरान मुख्य रूप से विवाह और तलाक, उत्तराधिकार और विरासत, भरण-पोषण तथा लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर राय रखी।
