VIRAL NEWS: Sonam Wangchuk’s wife Gitanjali Angmo’s old statement on ‘Hindu Rashtra’ goes viral!
VIRAL NEWS: पिछले साल सोनम वांगचुक के साथ शादी के बंधन में बंधीं गीतांजलि इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
उनके ‘सनातन धर्म’ और ‘हिंदू राष्ट्र’ से जुड़े पुराने बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं जहां वह हिंदू राष्ट्र की वकालत करती नजर आ रही हैं
सोशल मीडिया पर वांगचुक की पत्नी और लद्दाख के हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स (HIAL) की सह-संस्थापक गीतांजलि आंग्मो का एक पुराना वीडियो में भारत के लिए हिंदू सभ्यतागत ढांचे की वकालत करती हैं, संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठाती हैं, शासन की राष्ट्रपति प्रणाली का समर्थन कर रही हैं।
वने राम मंदिर आंदोलन का समर्थन कर रही हैं और ‘आर्य आक्रमण सिद्धांत’ को खारिज करती सुना जा रही हैं
उनका सबसे विवादास्पद बयान संविधान से “धर्मनिरपेक्ष” शब्द को हटाने की मांग थी। वीडियो में वह कहती हैं, “इसीलिए हमें अपने संविधान से ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द को फिर से औपनिवेशिक प्रभाव से मुक्त करना होगा।
हम ‘राजा ऋषि’ की बात करते हैं, हम ‘फिलॉसफर किंग’ की बात करते हैं, हम अपने जीवन के हर पहलू को धर्म से संचालित करने की बात करते हैं। तो हम राज्य और धर्म को अलग कैसे रख सकते हैं? क्योंकि भारत में यह धर्म नहीं है।”
आंगमो ने कहा, “वह कहते हैं कि संसदीय प्रणाली भारत का ‘स्वधर्म’ नहीं है, और भारत को अपनी गलती का एहसास होने में 100 साल लगेंगे… श्री अरबिंदो ने कहा था कि राष्ट्रपति प्रणाली, जिसमें बहुत मजबूत पंचायत व्यवस्था और ढीले संघीय राज्य हों, वही भारतीय लोकतंत्र का भविष्य है।”
आंगमो ने कहा, “जब हम हिंदू राष्ट्र या हिंदुत्व की बात करते हैं, तो हमें अब तक की सोच से कहीं आगे और गहराई से सोचने की जरूरत है। यह कोई अंध-राष्ट्रवाद या सिर्फ राजनीतिक नारेबाजी नहीं है। हमें असल में ठोस काम करना होगा।”
उन्होंने राम मंदिर के निर्माण का बचाव किया और इसे भारत की “सामूहिक चेतना” के लिए जरूरी बताया, जबकि कई हिंदू मंदिरों की मौजूदा हालत की आलोचना की।
उन्होंने कहा, “हमने यह राम मंदिर बनाया, जो इस देश की सामूहिक चेतना के लिए बहुत जरूरी था। लेकिन पहले मंदिर क्या थे? वे सिर्फ पूजा की जगह नहीं थे, बल्कि सीखने की भी जगह थे।”
इन बयानों के सामने आते ही सोशल मीडिया पर उनकी भारी ट्रोलिंग शुरू हो गई है। लोग उन पर और वांगचुक पर तीखे सवाल दाग रहे हैं। इस गुस्से की मुख्य वजह वह वैचारिक विरोधाभास है, जो जनता को महसूस हो रहा है।
