CHHATTSGARH : 9-year-old life sentence overturned, wife and lover acquitted
बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट ने बलौदाबाजार के चर्चित हत्याकांड में ट्रायल कोर्ट का बड़ा फैसला पलट दिया है। हाई कोर्ट ने मृतक की पत्नी और उसके कथित प्रेमी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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मामला साल 2014 का है। अभियोजन के मुताबिक, बलौदाबाजार के एक गांव में एक व्यक्ति की गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि मृतक की पत्नी और गांव के एक युवक के बीच कथित अवैध संबंध थे और दोनों ने मिलकर हत्या की साजिश रची।
इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने 2015 में दोनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की गई थी।
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि किसी व्यक्ति को आखिरी बार आरोपी के साथ देखे जाने यानी ‘लास्ट सीन’ और कथित अवैध संबंधों के आधार पर ही हत्या का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
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कोर्ट ने कहा कि ‘लास्ट सीन’ का सिद्धांत तभी लागू होता है, जब आरोपी और मृतक के साथ देखे जाने और शव मिलने के बीच का समय इतना कम हो कि किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका की संभावना खत्म हो जाए। इस मामले में मृतक का शव करीब दो दिन बाद मिला था।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि कथित अवैध संबंध हत्या का संभावित मकसद हो सकते हैं, लेकिन केवल मकसद अपराध का निर्णायक सबूत नहीं है। अभियोजन परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी और अटूट कड़ी साबित करने में नाकाम रहा।
इसी आधार पर कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
