CG Fertilizer Crisis: Political temperature rises over fertilizer shortage; Deepak Baij targets the Sai government!
रायपुर : छत्तीसगढ़ के किसान आने वाले खरीफ सीजन को लेकर काफी चिंतित दिख रहे हैं।
राज्य में खाद का स्टॉक तय लक्ष्य से काफी कम है, जिससे भविष्य में खाद का संकट पैदा होने की आशंका बढ़ गई है।
इसी को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि प्रदेश में उर्वरक के लिये मारा मारी शुरू हो गयी है। आधा जून बीत गया किसानों को सोसायटी में खाद नहीं मिल रहा है। किसान बराबर सरकार के मंत्रियों, विधायकों, सांसदों से उर्वरक के बारे में गुहार लगा रहे, लेकिन सरकार केवल जुबानी आश्वासन दे रही है।
आज भी प्रदेश के तीस प्रतिशत से कम सोसायटियों में ही खाद पहुंच पाया है। मानसून आने वाला है, खरीफ में धान की फसल ही राज्य के किसानों की आजीविका का मुख्य आधार है। यदि खरीफ के सीजन में सरकार किसानों को पर्याप्त उर्वरक नहीं दे पायेगी तो किसानों के सामने साल भर के लिये आजीविका का संकट पैदा हो जायेगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पिछले खरीफ सीजन में राज्य के किसानों को 14 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की आवश्यकता थी, साय सरकार शुरू के दो माह तक मात्र 80 हजार मीट्रिक टन ही उर्वरक दे पायी थी, आखिर तक जरूरत से आधे का भी इंतजाम नहीं कर पायी सरकार।
किसान यूरिया से लेकर डीएपी और पोटाश सभी के लिए भटकते रहे, बिचौलियों के द्वारा ब्लेक मार्केट में तीन से चार गुने दाम में किसानों को यूरिया और डीएपी खरीदने को मजबूर होना पड़ा था। इस खरीफ सीजन में 15 लाख 55 हजार मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता अनुमानित है, पर इस सरकार 50 प्रतिशत स्टाक नहीं जुटा पाई है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि खरीफ सीजन शुरू होने के पहले सरकार का दायित्व है कि वह किसानों के मांग के अनुरूप सोसायटियों में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक पहुंचाएं ताकि किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो सके। सरकार उर्वरकों की उपलब्धता पर श्वेत पत्र जारी करे। पिछली बार की तरह झूठ बोलकर किसानों को गुमराह मत करे।
मंत्री की हड़बड़ाहट बता रही है कि इस बार भी केंद्र की सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों के हक और अधिकार का उर्वरक देने से आनाकानी कर रही है और दलीय चाटुकारिता में भाजपा के नेता अभी से बहाने तलाश रहे है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार के संरक्षण में नकली खाद, अमानक खाद, नैनो यूरिया के नाम पर गुणवत्ताहीन खान लेने किसानों को मजबूर किया गया, ऐसे ही झूठे दावे सरकार ने पिछले करीब सीजन में भी सरकार करती रही और किसान खाद के लिए दर-दर भटकते रहे, यूरिया और डीएपी का स्टॉक डिमांड के आधा भी उपलब्ध नहीं कर पाई सरकार।
बिचोलीयों और कालाबाजारी करने वालों को इस सरकार का संरक्षण था चार गुना अधिक दाम पर किसान जमाखोरों से 460 का यूरिया 2000 में और 1350 का डीएपी 4 हजार तक में खरीदने मजबूर हुए फिर भी पर्याप्त खाद किसानों को नहीं मिल पाया, अब आगामी खरीफ सीजन में भी यही स्थिति बनती हुई दिख रही है।
