Bilaspur High Court: Employee’s Transfer Declared Illegal; State Government’s Order Quashed!
Bilaspur High Court : बिलासपुर हाई कोर्ट ने अहम न्यायिक फैसला सुनाते हुए कहा की नगर पालिका के किसी कर्मचारी को सीधे नगर निगम में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।
जस्टिस पी.पी साहू की एकल पीठ के फैसला सुनाने के साथ ही राज्य सरकार के ट्रांसफर आदेश को रद्द कर दिया।
बता दे की कुम्हारी नगर पालिका के मुख्य नगर अधिकारी नेतराम चंद्राकर का तबादला राज्य सरकार ने रायपुर नगर निगम में जोन कमिश्नर के पद पर कर दिया था।
इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता संदीप दुबे के माध्यम से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की।
याचिका में कहा गया कि नगर पालिका और नगर निगम दो अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयां हैं और इनके लिए अलग कानून लागू होते हैं। ऐसे में सीधे ट्रांसफर करना नियमों के खिलाफ है।
यदि किसी नगरपालिका कर्मचारी को नगर निगम में पदस्थ करना हो, तो वह केवल प्रतिनियुक्ति के माध्यम से संभव है, ट्रांसफर के जरिए नहीं।
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि ट्रांसफर सेवा का सामान्य हिस्सा है और अधिनियम में ऐसा कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि दोनों अधिनियमों में स्पष्ट रूप से अलग-अलग संस्थाओं के लिए अलग ट्रांसफर प्रावधान हैं।
किसी भी कानून में यह नहीं लिखा है कि नगर पालिका कर्मचारी को नगर निगम में स्थानांतरित किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता पहले रायपुर नगर निगम में कार्यरत था, लेकिन वह प्रतिनियुक्ति के आधार पर था, न कि ट्रांसफर से।
कोर्ट ने सभी तथ्यों और कानूनी प्रावधानों पर विचार करने के बाद 26 दिसंबर 2024 के ट्रांसफर आदेश को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया।
कोर्ट के फैसले से स्पष्ट संदेश गया है कि नियमों और कानूनों के दायरे में रहकर ही कर्मचारियों के तबादले किए जा सकते हैं, अन्यथा न्यायिक हस्तक्षेप तय है।

