Mahanadi water dispute: The matter has reached a crucial stage, with the tribunal to inspect the areas.
रायपुर: छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच वर्षों से चले आ रहे महानदी जल बंटवारे के विवाद को सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। महानदी जल विवाद अधिकरण की टीम 7 से 11 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ के महानदी कछार क्षेत्रों का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण करेगी। यह दौरा इस अंतरराज्यीय विवाद को हल करने की प्रक्रिया में बेहद निर्णायक माना जा रहा है।
ओडिशा के बाद अब छत्तीसगढ़ की बारी
ट्रिब्यूनल की अध्यक्षा जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय दल ने हाल ही में 2 मार्च तक ओडिशा के हीराकुंड बांध, संबलपुर और चिलिका झील जैसे प्रमुख क्षेत्रों का 5 दिवसीय दौरा पूरा किया है। अब यह दल छत्तीसगढ़ में निर्मित बैराजों और जल संरचनाओं का प्रत्यक्ष आकलन करेगा, ताकि जमीनी हकीकत के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जा सके।
अंतिम फैसले की ओर कदम
ट्रिब्यूनल का कार्यकाल 13 अप्रैल 2026 को समाप्त होने वाला है, जिसे देखते हुए इस निरीक्षण को काफी अहम माना जा रहा है। इस फील्ड विजिट के बाद 14 मार्च को दिल्ली में मामले की अगली सुनवाई होनी है, जिसमें दोनों राज्यों के बीच डेटा और तकनीकी पहलुओं पर अंतिम बहस हो सकती है

