रायपुर। होली से पहले छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में फाग गीतों के जरिए सियासी तंज देखने को मिला। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पारंपरिक फाग की तर्ज पर सरकार पर कटाक्ष किया और कवर्धा की चर्चित धान खराब होने की घटना का जिक्र किया।
भूपेश बघेल ने गीत गाते हुए कहा, “विष्णु दे दे बुल्लवा मुसवा को, मुसवा बिन घोटाला ना होए…”। गीत की पंक्तियां सुनते ही सदन की मीडिया गैलरी में ठहाके गूंज उठे। उनके तंज को कवर्धा में चूहों द्वारा करोड़ों रुपये के धान खराब किए जाने के मामले से जोड़कर देखा गया।
भाजपा का पलटवार
भाजपा ने भी उसी अंदाज में जवाब दिया। पार्टी प्रवक्ता अमित चिमनानी ने छत्तीसगढ़ी गीत गाते हुए कथित शराब और कोयला घोटाले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने अपने गीत में कहा कि घोटाले करने वाले “मुसवा” पकड़े जा चुके हैं, कोई जेल में है तो कोई जमानत पर।
फाग में सियासी व्यंग्य की परंपरा
होली के पारंपरिक फाग गीतों में सामाजिक और राजनीतिक व्यंग्य की पुरानी परंपरा रही है। बघेल के गीत में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर तंज था, जबकि भाजपा के जवाब में सुशासन का दावा दोहराया गया।
धान खरीदी पर हंगामा, विधायक निलंबित
शून्यकाल के दौरान धान खरीदी के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने किसानों से वादाखिलाफी का आरोप लगाया। विधायक उमेश पटेल ने पंजीकृत किसानों से धान नहीं खरीदे जाने और भुगतान लंबित होने का मुद्दा उठाया।
स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा नहीं होने से नाराज विपक्षी विधायक गर्भगृह में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। सदन की परंपरा के अनुसार गर्भगृह में जाने वाले विधायकों को निलंबित कर दिया गया।
होली से पहले विधानसभा में फाग के जरिए हुआ यह सियासी संग्राम अब प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है।

