CG DMF ROAD SCAM : State again issued notice on Nankiram Kanwar’s complaint
कोरबा। भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर की शिकायत पर कार्रवाई न होने से केंद्र सरकार नाराज़ नजर आ रही है। कोरबा में डीएमएफ फंड से सड़क निर्माण के मामले में केंद्र ने छत्तीसगढ़ शासन को एक बार फिर स्मरण पत्र भेजकर जवाब और की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है।
मामला दर्री के ध्यानचंद चौक से बजरंग चौक परसाभाठा होते हुए बालको तक सड़क निर्माण से जुड़ा है। इस सड़क के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद से करीब 26 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं, जिस पर ननकी राम कंवर ने कड़ी आपत्ति जताई है।
कंवर का कहना है कि यह सड़क बालको कंपनी द्वारा बनाई गई थी और इसका निर्माण या जीर्णोद्धार बालको के CSR फंड से होना चाहिए, न कि DMF राशि से। इसके बावजूद केंद्र सरकार के जांच निर्देशों को दरकिनार कर DMF फंड से न सिर्फ राशि स्वीकृत की गई, बल्कि टेंडर प्रक्रिया भी आगे बढ़ा दी गई।
पहले भी भेजा गया था नोटिस
ननकी राम कंवर ने 2 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री और कोयला एवं खान मंत्री को लिखित शिकायत भेजी थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि बालको को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से DMF फंड का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसके बाद केंद्र सरकार ने 18 अगस्त 2025 और फिर 24 नवंबर 2025 को मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन को नोटिस जारी किया।
इसके बावजूद तत्कालीन कलेक्टर अजीत वसंत द्वारा स्थानांतरण से पहले इस सड़क निर्माण को टेंडर प्रक्रिया में डाल दिया गया और टेंडर भी जारी कर दिया गया।
केंद्र के निर्देशों की अवहेलना?
गौर करने वाली बात यह है कि भारत सरकार पहले ही इस निर्माण कार्य की जांच के निर्देश दे चुकी है। ऐसे में टेंडर जारी किया जाना केंद्र सरकार के आदेशों और DMF गाइडलाइन की खुली अवहेलना माना जा रहा है।
ननकी राम कंवर ने मांग की है कि टेंडर को तत्काल निरस्त किया जाए, सड़क निर्माण बालको कंपनी के खर्च पर कराया जाए और जिन अधिकारियों ने केंद्र के निर्देशों के बावजूद टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ाई, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
13 जनवरी 2026 का नया पत्र
केंद्र सरकार के खान मंत्रालय के अवर सचिव ने 13 जनवरी 2026 को एक बार फिर मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन को पत्र लिखकर एमएमडीआर एक्ट और पीएमकेकेकेवाई गाइडलाइंस के तहत आवश्यक कार्रवाई करने और की गई कार्रवाई की जानकारी शीघ्र देने के निर्देश दिए हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि राज्य सरकार केंद्र के निर्देशों का पालन करते हुए टेंडर निरस्त करती है या फिर DMF गाइडलाइन की अनदेखी जारी रहती है।
