प्रस्तावित फैक्ट्री के खिलाफ एक बार फिर ग्रामीण करेंगे विरोध प्रदर्शन

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अंबिकापुर। सरगुजा जिले के बतौली ब्लाक के ग्राम पंचायत चिरंगा में प्रस्तावित मां कुदरगढ़ी एल्युमीनियम रिफाइनरी फैक्ट्री जो शासकीय भूमि पर है और शासन ने छत्तीसगढ़ इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को एलॉट किया गया था उक्त भूमि को मां कुदरगढ़ी एल्युमीनियम रिफाइनरी फैक्ट्री के डायरेक्टर अनिल अग्रवाल के नाम 31/3/2022 को नामांतरण करवा लिया। प्रस्तावित फैक्ट्री के खिलाफ एक बार फिर स्वर बुलंद कर ग्रामीण विरोध प्रदर्शन करेंगे।

प्रबंधन के रसूख के आगे प्रशासन नतमस्तक – ग्राम चिरंगा में प्रस्तावित मां कुदरगढ़ी एल्यमीनियम रिफाइनरी फैक्ट्री को शुरू कराने के लिए प्रबंधन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। हर फर्जी हथकंडे का इस्तेमाल फैक्ट्री प्रबंधन कर रहा है। यही नहीं जिला प्रशासन का भी खुला समर्थन फैक्ट्री प्रबंधन को मिल रहा है। मां कुदरगढ़ी फैक्ट्री प्रबंधन के रसूख के आगे प्रशासनिक अधिकारी नतमस्तक हैं। यही वजह है कि आदिवासियों की सेटलमेंट की जमीन, पट्टे की भूमि गोचर की भूमि सहित अन्य मदों की भूमि को फैक्ट्री प्रबंधन अधिकारियों से मिलीभगत कर बाहरी लोगों के नाम पर धड़ल्ले से खरीद रहा है। स्थानीय ग्रामीणों के विरोध के बावजूद चिरंगा ग्राम पंचायत में जमीन की खरीदी बिक्री पर रोक लगती नहीं दिख रही है। जिसका सीधा फायदा फैक्ट्री प्रबंधन को मिल रहा है।

फर्जी ग्रामसभा की जांच प्रक्रिया पर सवाल – आरोप है कि ग्राम पंचायत चिरंगा में प्रस्तावित फैक्ट्री की स्थापना के लिए फैक्ट्री प्रबंधन ने फर्जी तरीके से ग्राम सभा का आयोजन करवा कर प्रस्ताव भी पारित करवा लिया था। वही जब इसकी जानकारी ग्रामीणों को लगी तो ग्रामीण हाईकोर्ट की शरण में गए थे। इधर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद कलेक्टर सरगुजा ने षडयंत्र पूर्वक ढंग से आयोजित किए गए ग्राम सभा की जांच का जिम्मा एसडीएम सीतापुर को दिया था। लेकिन एसडीएम की जांच प्रक्रिया पर ग्रामीण लगातार सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन के इशारों पर अधिकारी पूरे मामले को ग्राम पंचायत में नही जा कर 10,15 ग्रामीणों को एसडीएमऑफिस बुला कर बयान लिया गया है तो ऐसे में जांच प्रक्रिया कैसे निष्पक्ष हो सकती है।

शुरू से विवादों में है प्रस्तावित फैक्ट्री – ग्राम पंचायत चिरंगा में प्रस्तावित मां कुदरगढ़ी एल्युमीनियम रिफाइनरी फैक्ट्री शुरू से विवादों में है। फैक्ट्री की स्थापना के लिए फर्जी जनसुनवाई का आयोजन किया गया था। जन सुनवाई के दौरान फैक्ट्री की स्थापना के विरोध में 7 पंचायत के ग्रामीणों का जबरदस्त विरोध देखने को मिला था। जन सुनवाई के दौरान आक्रोशित ग्रामीणों ने फैक्टरी प्रबंधन के अधिकारियों कर्मचारियों की पिटाई भी की थी। लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन के रसूख के आगे ग्रामीणों की एक नहीं चली। नतीजा धरना प्रदर्शन, चक्का जाम, तहसील कार्यालय का घेराव करना ग्रामीणों को महंगा पड़ गया। कई ग्रामीणों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज भी किया। हालांकि ग्रामीण आज भी फैक्ट्री के विरोध में आंदोलन करने से पीछे नहीं हट रहे है।

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