BABA BAIDYANATH YATRA : Kanwariyas reached Deoghar on foot… heard important things about Bihar politics on the way.
रायपुर. छत्तीसगढ़ से पहुंचे करीब 70 कांवड़ियों ने 110 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा पूरी कर बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग में जलाभिषेक किया। साधना न्यूज के ग्रुप एडिटर आर.के. गांधी और छत्तीसगढ़ वॉच के संपादक रामअवतार तिवारी ने भी बाबा के दरबार में गंगाजल अर्पित कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की।
सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर निकले श्रद्धालुओं ने “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ पूरी यात्रा पूरी की। देवघर पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना की गई। आर.के. गांधी ने कहा कि यह यात्रा सिर्फ 110 किलोमीटर पैदल चलने का नाम नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन, तप और आत्मविश्वास की परीक्षा है। वहीं रामअवतार तिवारी ने इसे सनातन संस्कृति, सेवा और समर्पण का प्रतीक बताया।
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इस बार कांवड़ यात्रा में सिर्फ भक्ति ही नहीं, बल्कि बिहार सरकार की व्यवस्थाओं की भी खूब चर्चा रही। सुल्तानगंज से देवघर तक सेवा शिविर, चिकित्सा सुविधा, पेयजल, सुरक्षा, स्वच्छता, विश्राम स्थल और विभागीय सहायता केंद्रों ने लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान बनाया। बारह ज्योतिर्लिंगों की भव्य प्रतिकृतियों वाले प्रवेश द्वार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने।
कांवड़ पथ के विकास की मजबूत नींव पूर्व पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन के कार्यकाल में रखे गए कार्यों से जुड़ी मानी जाती है। वर्तमान बिहार सरकार ने भी इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए यात्रा को और अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए कई नई व्यवस्थाएं लागू कीं। सुल्तानगंज से देवघर तक लगभग 110 किलोमीटर की यात्रा का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा बिहार में पड़ता है, इसलिए सड़क, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।
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यात्रा के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच बिहार की राजनीति भी चर्चा का विषय बनी रही। कई लोगों ने हालिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रशांत किशोर की जीत से ज्यादा चर्चा उस सीट पर बीजेपी की हार की रही, जिसे नितिन नवीन का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। बातचीत में यह भी कहा गया कि उनके बूथ क्षेत्र में भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। कुछ लोग इसे पार्टी के अंदरूनी मतभेदों से जोड़कर देखते नजर आए, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यात्रा के दौरान सम्राट चौधरी के कामकाज और प्रशासनिक शैली पर भी अलग-अलग राय सामने आई। कई लोगों का मानना था कि आने वाले समय में बिहार बीजेपी को संगठन स्तर पर और मेहनत करनी होगी। हालांकि ये सभी बातें यात्रा के दौरान लोगों के बीच हुई चर्चाओं और राजनीतिक विश्लेषण का हिस्सा रहीं।
आस्था, सेवा, बेहतर व्यवस्थाओं और राजनीतिक चर्चाओं के बीच इस बार की कांवड़ यात्रा श्रद्धालुओं के लिए सिर्फ धार्मिक अनुभव नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संवाद का भी एक बड़ा मंच बनकर उभरी।
