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कोयला खदान में उतरे ग्रामीणों ने कोल-मिट्टी परिवहन में लगी भारी वाहनों को रोका

कोरबा। एक ओर जिले की खदानें कोयला उत्पादन लक्ष्य से लगातार पिछड़ रही है दूसरी ओर भू विस्थापित ग्रामीण आए दिन धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इन आंदोलनों की वजह से कोयला उत्पादन निरंतर घट रहा है। जिले की मेगा परियोजना कुसमुंडा कोयला खदान की बात करें तो बीते एक सप्ताह में ही यहां तीन संगठनों ने आंदोलन किया है। इससे कोयला उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आंदोलनों की सबसे बड़ी वजह भूविस्थापित ग्रामीणों व ऐसे सेल प्रबंधन के बीच रोजगार मुआवजा इत्यादि विषयों पर आपसी तालमेल में समन्वय न बैठना है।

बीते चार सितंबर 2022 को कुसमुंडा खदान से लगे ग्राम पडनिया के ग्रामीणों ने रोजगार की मांग को लेकर कुसमुंडा खदान में नीलकंठ कंपनी का काम बंद करवा दिया था। काम लगभग तीन घंटे बंद रहा जिसके बाद एसईसीएल के अधिकारियों ने ग्रामीणों को उनकी समस्याओं के हल के लिए आगामी 15 सितंबर को कुसमुंडा जीम के साथ बैठक करने का आश्वासन दिया थाए परंतु आज फिर दो दिन बाद सोनपुरी पडनिया गांव के ग्रामीण फिर से खदान में उतर गए और नीलकंठ कंपनी का काम फिर से बंद करा दिया। फिलहाल मौके पर मिट्टी व कोल डिस्पैच में लगी गाड़ियों को रोक दिया गया है एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन के अधिकारी अभी मौके पर नहीं पहुंचे हैं।

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