AIRPORT DEAL CANCELLED : UAE breaks Pakistan airport deal
इस्लामाबाद/नई दिल्ली, 26 जनवरी। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन को लेकर प्रस्तावित डील को खत्म कर दिया है। पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक UAE ने एयरपोर्ट ऑपरेशन से खुद को अलग कर लिया है। इस फैसले को UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की हालिया भारत यात्रा से जोड़कर देखा जा रहा है।
शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान 19 जनवरी को अचानक भारत दौरे पर आए थे। उनकी यात्रा की घोषणा सिर्फ एक दिन पहले की गई थी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए खुद उन्हें दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर रिसीव किया। दोनों देशों के बीच ट्रेड, डिफेंस और रणनीतिक सहयोग से जुड़े 9 अहम समझौतों पर सहमति बनी।
वहीं पाकिस्तान सरकार ने 24 जनवरी को सफाई देते हुए कहा कि UAE के साथ इस्लामाबाद एयरपोर्ट को लीज पर देने या संचालन सौंपने को लेकर कोई अंतिम डील हुई ही नहीं थी। सरकार ने मीडिया रिपोर्ट्स को भ्रामक बताया और कहा कि पाकिस्तान ने कोई औपचारिक समझौता रद्द नहीं किया है।
दरअसल, अगस्त 2025 में UAE और पाकिस्तान के बीच इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन को लेकर शुरुआती बातचीत शुरू हुई थी। योजना थी कि UAE की कोई कंपनी एयरपोर्ट का मैनेजमेंट और ऑपरेशन संभालेगी। इसे पाकिस्तान की आर्थिक तंगी और एविएशन सेक्टर को सुधारने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा था।
हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि नाहयान की भारत यात्रा के बाद UAE ने पाकिस्तान से दूरी बना ली। NDTV और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक UAE को पाकिस्तान में लोकल पार्टनर ढूंढ़ने में दिक्कत हो रही थी, जिससे डील आगे नहीं बढ़ सकी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान-UAE संबंधों में हालिया तनाव की एक वजह पाकिस्तान का सऊदी अरब और तुर्किये के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग भी है। सितंबर 2025 में पाकिस्तान-सऊदी डिफेंस समझौते के बाद UAE की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी। वहीं UAE अब भारत के साथ डिफेंस और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत कर रहा है।
गौरतलब है कि इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पाकिस्तान का सबसे बड़ा और आधुनिक एयरपोर्ट है, जिसकी लागत करीब 90 अरब पाकिस्तानी रुपये रही है। इससे रोजाना 45 से 50 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन होता है।
UAE के इस कदम को पाकिस्तान के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब वह आर्थिक संकट से जूझ रहा है और पहले ही अपनी सरकारी एयरलाइन PIA का निजीकरण कर चुका है।

