MANOJ BEHARWAL STATEMENT : कॉन्फ्रेंस में प्रिंसिपल का पाकिस्तान बयान

Date:

- Advertisement -
RADA Auto Expo Portal

MANOJ BEHARWAL STATEMENT : Principal’s statement on Pakistan in the conference

ब्यावर/अजमेर, 26 जनवरी। राजस्थान के अजमेर स्थित सम्राट पृथ्वीराज चौहान गवर्नमेंट कॉलेज के प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल का पाकिस्तान और आज़ादी को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है। यह बयान उन्होंने 24 जनवरी को ब्यावर के सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय में आयोजित राजस्थान सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन की 31वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया।

प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल ने कहा कि 14 अगस्त 1947 को विश्व पटल पर पाकिस्तान का नाम आया, जबकि भारत का उदय 15 अगस्त 1947 को सुबह हुआ। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत से पहले अस्तित्व में आया और उसे शुरू से ही विशेष सुविधाएं दी गईं, जिसके चलते वह खुद को “बड़ा भाई” समझने लगा।

बेहरवाल ने कहा कि आज़ादी के समय देश में केवल तीन बड़े नेता थे, महात्मा गांधी, मोहम्मद अली जिन्ना और डॉ. भीमराव अंबेडकर। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में जवाहरलाल नेहरू लोकप्रिय नेताओं में शामिल नहीं थे। उन्होंने एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी पत्रकार पहले गांधी के पास गए, फिर जिन्ना के पास और अंत में रात 12 बजे अंबेडकर से मिले, जो उस समय हिंदू कोड बिल पर काम कर रहे थे।

उन्होंने अंबेडकर के कथन का हवाला देते हुए कहा कि अंबेडकर ने कहा था “उन दोनों के समाज जाग चुके हैं, इसलिए वे सो गए हैं, लेकिन मेरा समाज अभी सो रहा है, इसलिए मुझे जागना पड़ रहा है।” बेहरवाल ने इसे भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ा।

पाकिस्तान को लेकर उन्होंने कहा कि उसने खुद को इस्लामिक राष्ट्र घोषित कर लिया और सोचा कि वह बहुत कुछ हासिल कर लेगा, लेकिन भारत ने उसे 45 करोड़ रुपये दिए ताकि वह अपने अस्तित्व को संभाल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने इन पैसों का इस्तेमाल आतंकवाद में किया।

प्रिंसिपल बेहरवाल ने यह भी कहा कि 2014 के बाद पहली बार भारतीय राजनीति और समाज के बीच भारतीय ज्ञान परंपरा का वास्तविक जुड़ाव हुआ है। इससे पहले राजनीति समाज को तोड़ने का काम करती थी। उन्होंने कहा कि जो समाज अपना इतिहास नहीं जानता, उसका पतन तय है और पढ़े-लिखे लोगों को समाज से जुड़कर काम करना चाहिए।

गौरतलब है कि यह दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस 23 और 24 जनवरी को आयोजित हुई थी, जिसमें भारत के 7 राज्यों, राजस्थान के 20 से अधिक जिलों और 3 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का विषय भारतीय ज्ञान परंपरा रहा।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि सीए अंकुर गोयल, मुख्य वक्ता राजस्थान विश्वविद्यालय के प्रो. एम.एल. शर्मा रहे। अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. रेखा मंडोवरा ने की। संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. दुष्यंत पारीक और सह-समन्वयक डॉ. मानक राम सिंगारिया थे।

 

 

- Advertisement -
RADA Auto Expo Portal

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img
spot_imgspot_img

#Crime Updates

More like this
Related