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REPO RATE HIKE : अचानक रेपो रेट बढ़ाने का RBI ने किया ऐलान, जानें आपके जेब पर क्या पड़ेगा असर

RBI announces sudden increase in repo rate, know what will be the effect on your pocket

डेस्क। रिजर्व बैंक ने बुधवार को अचानक रेपो रेट बढ़ाने का ऐलान कर हर किसी को हैरान कर दिया. रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने दोपहर 2 बजे अप्रत्याशित प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि मौद्रिक नीति समिति ने एकमत से रेपो रेट 0.40 फीसदी बढ़ाने का फैसला किया है. केंद्रीय बैंक के इस फैसले के बाद अब रेपो रेट 4 फीसदी के निचले स्तर से बढ़कर 4.40 फीसदी हो गया है. आरबीआई गवर्नर ने रेपो रेट बढ़ाने के पीछे जो वजह बताई, उसने लोगों की हैरानी और बढ़ा दी.

महंगाई पर एक महीने पहले ये थी राय –

दरअसल आरबीआई गवर्नर दास ने पिछले महीने इस फाइनेंशियल ईयर की पहली एमपीसी बैठक के बाद लगातार 11वीं बार रेपो रेट को नहीं बदलने का ऐलान किया था. हालांकि तब बाजार और तमाम एनालिस्ट अनुमान जता रहे थे कि आरबीआई ब्याज दरें बढ़ाएगा. हर किसी को बेकाबू होती महंगाई के कारण यह आशंका थी. तब गवर्नर दास ने एमपीसी की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा था कि सेंट्रल बैंक के लिए महंगाई कोई चिंता की बात नहीं है. उन्होंने कहा था कि सेंट्रल बैंक के लिए इकोनॉमिक ग्रोथ प्रॉयरिटी है और इसी कारण ब्याज दरों को निचले स्तर पर बरकरार रखा गया है.

एक महीने में बदला RBI गवर्नर का विचार –

आरबीआई गवर्नर आज जब अचानक मीडिया के सामने आए तो उन्होंने बेकाबू महंगाई का हवाला देते हुए रेपो रेट बढ़ाने की जानकारी दी. दास की इस बात से यह सवाल सबके मन में उठ रहा है कि एक महीने से भी कम समय में अचानक परिस्थितियां इतनी कैसे बदल गईं. 25-26 दिन पहले जो महंगाई चिंता की बात नहीं थी, आज अचानक इतनी गंभीर हो गई कि रिजर्व बैंक को एक झटके में रेपो रेट 0.40 फीसदी बढ़ाने का फैसला लेना पड़ गया. इतना ही नहीं सेंट्रल बैंक ने कैश रिजर्व रेशियो (CRR) को भी 0.50 फीसदी बढ़ाने का निर्णय लिया. गवर्नर दास ने खुद बताया कि सीआरआर बढ़ाने के इस फैसले से मार्केट में लिक्विडिटी में 83,711 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कमी आएगी. सेंट्रल बैंक का यह कदम भी महंगाई को काबू करने पर ही केंद्रित है.

इन कारणों से बढ़ रही खुदरा महंगाई –

गवर्नर दास की मानें तो रूस-यूक्रेन के बीच एक महीने से ज्यादा समय से चल रही लड़ाई ने रिजर्व बैंक को अचानक फैसला लेने पर मजबूर किया. उन्होंने कहा कि पूर्वी यूरोप में जारी जंग के चलते ऐसे हालात पैदा हो गए कि आरबीआई को 01 अगस्त 2018 के बाद पहली बार ब्याज दरें बढ़ाने का निर्णय लेना पड़ा. बकौल दास, यूरोप में जारी लड़ाई और कुछ प्रमुख उत्पादक देशों के प्रतिबंध के कारण खाने के तेल (Edible Oil) समेत कुछ ऐसे सामानों की कमी हो गई है, जो भारत के लिए महंगाई के लिहाज से संवेदनशील हैं. इसके अलावा फर्टिलाइजर्स के दाम में उछाल ने इनपुट कॉस्ट बढ़ा दिया है और भारत में खाने के सामानों के दाम पर इसका सीधा असर हुआ है.

महंगाई से हाल-फिलहाल नहीं मिलेगी राहत –

दास ने अचानक ब्याज दरें बढ़ाने के फैसले को तार्किक बताते हुए जोड़ा कि मार्च 2022 में खुदरा महंगाई तेजी से बढ़ी. उन्होंने कहा कि खासकर खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने के कारण खुदरा महंगाई मार्च 2022 में 7 फीसदी पर पहुंच गई. गवर्नर ने बताया कि मार्च महीने में खाने-पीने के सामानों के 12 उपसमूहों में से 9 में महंगाई बढ़ी. अप्रैल के हाई-फ्रीक्वेंसी प्राइस इंडेक्स बताते हैं कि अप्रैल महीने में भी खाने-पीने की चीजों के दाम पर महंगाई का प्रेशर बरकरार है. एमपीसी का मानना है कि आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई ऊंची ही रहने वाली है.

एक्सपर्ट्स की राय, RBI के पास नहीं था विकल्प –

एक्सपर्ट्स भी आरबीआई गवर्नर दास के तर्क से सहमति जता रहे हैं. इन्वेस्टमेंट कंसल्टेंसी फर्म मिलवुड केन इंटरनेशनल के फाउंडर व सीईओ निश भट्ट बताते हैं कि महंगाई के प्रेशर के चलते सेंट्रल बैंक के पास कोई और चारा ही नहीं बचा था. उन्होंने कहा, ‘सेंट्रल बैंक ने बेकाबू होती महंगाई को काबू करने के लिए हैरान करते हुए अचानक रेपो रेट बढ़ाने का ऐलान किया. सेंट्रल बैंक का यह कदम महंगाई की दर को कम करने के लिए है. सीआरआर बढ़ाने से नरम मौद्रिक नीति का दौर समाप्त होगा और मार्केट से एक्सेस लिक्विडिटी गायब होगी. खाने-पीने की चीजों की महंगाई पर गवर्नर ने जो कहा, वह वास्तव में चिंता की बात है. राहत की बात यह है कि उन्होंने अब इसके बाद अप्रत्याशित ऐलान के बजाय कैलिब्रेटेड फैसले का भरोसा दिया है.’

घर खरीदने के सपने पर होगी सीधी चोट –

रिजर्व बैंक का रेपो रेट बढ़ाने का फैसला उन लोगों को अधिक परेशानी देने वाला है, जो होम लोन या कार लोन (Car Loan) की ईएमआई (EMI) भर रहे हैं या फिर आने वाले समय में अपना घर खरीदने की तैयारी कर रहे हैं. ब्याज दरें बढ़ने से रियल एस्टेट सेक्टर (Real Estate Sector) की भी परेशानियां बढ़ सकती हैं, जो पहले ही 2-3 साल से बदहाल चल रहा है. रियल एस्टेट सेक्टर में कंसल्टेंसी सर्विस देने वाली कंपनी नाईट फ्रैंक इंडिया (Knight Frank India) का भी ऐसा ही मानना है. हालांकि कंसल्टेंसी फर्म के सीनियर एक्सीक्यूटिव डाइरेक्टर गुलाम जिआ (Gulam Zia) का कहना है कि रिजर्व बैंक ब्याज दरें देर-सबेर बढ़ाएगा, यह तो एक्सपेक्टेड ही था. उन्होंने कहा कि जिस तरह से जिओपॉलिटिकल परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और ग्लोबल सप्लाई चेन व कमॉडिटी की कीमतों पर इसका असर हो रहा है, ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला होना ही था. यह अलग बात है कि इससे होम लोन की ईएमआई बढ़ जाएगी, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर पर असर पड़ेगा. सस्ते लोन के कारण पिछले 2 साल में रियल एस्टेट सेक्टर को काफी राहत मिली थी.

 

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