स्पेशल रिपोर्ट / दीपक तिवारी
कवर्धा (कबीरधाम)। जिले के खाद्य विभाग में इस बार गजब का खेल हुआ है — करोड़ों रुपए का राशन और शक्कर घोटाला सामने आया है। गरीब, आदिवासी और पात्र लोगों के नाम पर उठाया गया अनाज और शक्कर बाजार में बेचा गया। विभाग के अंदर बैठे कुछ अफसर और सप्लाई सिस्टम से जुड़े लोग मिलकर आदिवासियों के हिस्से का राशन डकार गए!
जांच में खुलासा:
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कई दुकानों में स्टॉक रजिस्टर और वितरण सूची में भारी हेराफेरी पाई गई है। जिन आदिवासियों को महीनों से राशन नहीं मिला, उनके नाम से शक्कर और चावल का उठाव दिखाया गया है। कई कार्डधारकों को पता ही नहीं कि उनके नाम पर हर महीने अनाज उठाया जा रहा है।
कहां गया करोड़ों का अनाज?
कथित तौर पर इस घोटाले में विभाग के अधिकारी, सहकारी समितियों के प्रबंधक और कुछ बिचौलियों की मिलीभगत सामने आ रही है। घोटाले की रकम करोड़ों में बताई जा रही है। सूत्र कहते हैं — “यह सिर्फ बर्फ की एक नोक है, असली आंकड़ा इससे कहीं बड़ा है।”
जनता का सवाल:
आखिर कब तक गरीब और आदिवासियों का हक सरकारी फाइलों और भ्रष्ट अफसरों की जेब में दबता रहेगा? जब हर कार्ड डिजिटल है, तो फिर यह फर्जी उठाव कैसे हुआ? कौन है वो हाथ जो सिस्टम के भीतर से इस खेल को चला रहा है?
जनता की नाराज़गी:
गांव-गांव में लोग अब खुलकर विरोध की तैयारी में हैं। “हमारे बच्चों का राशन किसी और की थाली में कैसे गया?” — यह सवाल हर आदिवासी गांव में गूंज रहा है।
अब क्या होगा?
मामला अब जिला प्रशासन के संज्ञान में आया है। जांच की बात तो हो रही है, लेकिन लोगों का कहना है कि “जांच नहीं, गिरफ्तारी चाहिए!”

