रामकृष्ण केयर अस्पताल: युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं स्ट्रोक के मामले, लेकिन अधिकांश मरीज देर से पहुंच रहे हैं अस्पताल

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Ramakrishna Care Hospitals: Stroke cases are rising rapidly among the youth, yet most patients are reaching the hospital late.

 

 

• तंत्रिका संबंधी रोग अब दुनिया में दिव्यांगता का सबसे बड़ा कारण

• भारत में हर वर्ष लगभग 12.5 लाख नए स्ट्रोक के मामले सामने आते हैं

• अधिकांश मरीज लकवा या गंभीर मस्तिष्क क्षति के बाद ही उन्नत अस्पतालों तक पहुंचते हैं

• समय पर पहचान और शीघ्र उपचार से आजीवन दिव्यांगता रोकी जा सकती है

 

रायपुर: विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, तंत्रिका संबंधी रोग अब पूरी दुनिया में दिव्यांगता का सबसे बड़ा कारण बन चुके हैं। विश्व की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी, यानी 3.4 अरब से ज्यादा लोग मस्तिष्क, मेरुदंड और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी किसी न किसी बीमारी से प्रभावित हैं। हर वर्ष इन बीमारियों के कारण 1.1 करोड़ से अधिक लोगों की मृत्यु होती है। यही वजह है कि तंत्रिका संबंधी रोग आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हो चुके हैं।

 

इन बीमारियों में स्ट्रोक सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है। भारत में हर वर्ष लगभग 12.5 लाख नए स्ट्रोक के मामले सामने आते हैं। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, पिछले तीन दशकों में इनकी संख्या लगातार बढ़ी है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, तंबाकू का सेवन, मानसिक तनाव, अपर्याप्त नींद, अस्वस्थ जीवनशैली और बढ़ती आयु इसके प्रमुख कारण हैं। इसके साथ ही मधुमेह और उच्च रक्तचाप की दवाओं का अनियमित सेवन तथा नियमित चिकित्सकीय जांच और फॉलो-अप की कमी इस जोखिम को और अधिक बढ़ा रही है।

 

“सभी के लिए मस्तिष्क स्वास्थ्य” विषय पर मनाए जा रहे विश्व मस्तिष्क दिवस के अवसर पर रामकृष्ण केयर अस्पताल के तंत्रिका रोग विशेषज्ञों ने लोगों से जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि तंत्रिका संबंधी रोगों के उपचार में चिकित्सा विज्ञान ने उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन आज भी अधिकांश मरीज शुरुआती चेतावनी संकेतों को पहचान नहीं पाते या उन्नत न्यूरो साइंस सुविधा वाले अस्पताल तक पहुंचने में देर कर देते हैं। परिणामस्वरूप उपचार का बहुमूल्य समय हाथ से निकल जाता है।

 

विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अधिकांश मरीज तब तक अस्पताल नहीं पहुंचते जब तक बीमारी गंभीर रूप नहीं ले लेती। कई मरीज लकवा, बेहोशी, बार-बार दौरे पड़ना, बोलने में गंभीर कठिनाई या अचानक दृष्टि चली जाने जैसी गंभीर स्थिति के बाद ही आपातकालीन विभाग तक पहुंचते हैं। तब तक उपचार का महत्वपूर्ण अवसर कई बार निकल चुका होता है। अनेक मामलों में मरीज पहले आसपास के छोटे अस्पतालों, क्लीनिकों अथवा झाड़-फूंक और चमत्कारी इलाज का दावा करने वाले लोगों के पास चले जाते हैं। इस कारण बहुमूल्य समय नष्ट हो जाता है और बाद में उन्हें ऐसे समग्र न्यूरो साइंस केंद्रों में भेजा जाता है, जहां उन्नत स्ट्रोक उपचार, रक्त के थक्के को घोलने की सुविधा, आपातकालीन मस्तिष्क शल्य चिकित्सा और विशेष तंत्रिका रोग उपचार उपलब्ध होता है। इस प्रकार की देरी स्थायी दिव्यांगता, लंबे पुनर्वास और यहां तक कि मृत्यु का जोखिम भी कई गुना बढ़ा देती है।

 

डॉ. संजय शर्मा, वरिष्ठ चिकित्सक न्यूरोलॉजी, रामकृष्ण केयर अस्पताल, ने कहा, “तंत्रिका संबंधी आपात स्थितियों में सबसे बड़ी चुनौती लक्षणों की देर से पहचान है। अब हम कम उम्र के लोगों में भी स्ट्रोक और अन्य तंत्रिका संबंधी रोग तेजी से बढ़ते देख रहे हैं। दुर्भाग्य से लोग अचानक शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन, अस्पष्ट बोलना, चेहरे का टेढ़ा होना, चक्कर आना या दृष्टि में बदलाव जैसे लक्षणों को तनाव या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। दूसरी बड़ी समस्या यह है कि मरीज कई अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद

हमारे पास पहुंचते हैं। इस दौरान उपचार का अमूल्य समय नष्ट हो जाता है। विशेष रूप से स्ट्रोक में हर मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि थोड़ी सी देरी भी मस्तिष्क को स्थायी क्षति पहुंचा सकती है।

इसलिए स्ट्रोक के लक्षण शुरू होने के बाद मरीज को अधिकतम साढ़े चार घंटे के भीतर, और जितना जल्दी संभव हो सके, अस्पताल पहुंचना चाहिए।”

 

डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना, नियमित व्यायाम करना, संतुलित आहार लेना, पर्याप्त नींद लेना, तनाव कम करना, तंबाकू से दूर रहना और शराब का सीमित सेवन करना स्ट्रोक तथा कई अन्य तंत्रिका संबंधी रोगों के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।

 

स्ट्रोक उपचार की तात्कालिकता पर जोर देते हुए डॉ. अर्पित अग्रवाल, चिकित्सक न्यूरोलॉजी, रामकृष्ण केयर अस्पताल, ने कहा, “बिना उपचार के स्टोक होने पर हर मिनट लगभग 19 लाख मस्तिष्क कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। शुरुआती साढ़े चार घंटे, जिन्हें ‘स्वर्णिम समय’ कहा जाता है, सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इस अवधि में सही उपचार मिल जाए तो स्थायी दिव्यांगता रोकी जा सकती है और मरीज का जीवन बचाया जा सकता है। जितनी जल्दी मरीज समग्र स्ट्रोक उपचार सुविधा वाले अस्पताल पहुंचेगा, उतनी ही अधिक पूर्ण स्वस्थ होने की संभावना रहेगी।”

 

उपचार में आई आधुनिक प्रगति पर प्रकाश डालते हुए डॉ. एस. एन. मधारिया, वरिष्ठ चिकित्सक – न्यूरो सर्जरी, रामकृष्ण केयर अस्पताल, ने कहा, “न्यूरो साइंस के क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति ने जटिल मस्तिष्क रोगों के उपचार को पूरी तरह बदल दिया है। आज अत्याधुनिक चुंबकीय अनुनाद जांच, न्यूरो नेविगेशन प्रणाली, ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप, न्यूनतम चीरा आधारित मस्तिष्क शल्य चिकित्सा तकनीक और विशेष न्यूरो क्रिटिकल केयर की मदद से मस्तिष्क के ट्यूमर, गंभीर सिर की चोट, हाइड्रोसेफेलस तथा अनेक अन्य तंत्रिका संबंधी रोगों का उपचार पहले की तुलना में अधिक सटीक, सुरक्षित और बेहतर परिणामों के साथ संभव हो गया है। लेकिन आधुनिक तकनीक तभी जीवन बचा सकती है, जब मरीज बिना देरी सही अस्पताल तक पहुंचे।”

 

विश्व मस्तिष्क दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. अनिंद्य राय, वरिष्ठ चिकित्सक न्यूरो सर्जरी, रामकृष्ण केयर अस्पताल, ने कहा, “विश्व मस्तिष्क दिवस हमें याद दिलाता है कि मस्तिष्क हमारे हर विचार, हर गतिविधि और हर स्मृति का नियंत्रण केंद्र है। विशेष रूप से स्ट्रोक और सिर की गंभीर चोट जैसी तंत्रिका संबंधी आपात स्थितियों में यदि मरीज समय पर अस्पताल पहुंच जाए तो सफल उपचार संभव है। अचानक शरीर में कमजोरी, बोलने में कठिनाई, तेज सिरदर्द या बेहोशी जैसे चेतावनी संकेतों को पहचानना जीवन बचा सकता है और स्थायी दिव्यांगता से भी बचा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, उच्च रक्तचाप और मधुमेह को नियंत्रित रखना तथा तंबाकू से दूरी बनाए रखना मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। समय पर जांच, शीघ्र उपचार और जनजागरूकता ही तंत्रिका संबंधी रोगों का बढ़ता बोझ कम करने के सबसे प्रभावी उपाय हैं।”

 

इन चेतावनी संकेतों को कभी नजरअंदाज न करें

 

चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन, विशेषकर शरीर के एक तरफ  

• बोलने या दूसरों की बात समझने में अचानक कठिनाई  

• अचानक दृष्टि धुंधली होना, दिखाई देना बंद होना या दो-दो दिखाई देना  

• अचानक और अत्यधिक तेज सिरदर्द, जो पहले कभी न हुआ हो  

• संतुलन बिगड़ना या चलने में कठिनाई  

• बिना किसी स्पष्ट कारण के दौरे पड़ना  

• कई दिनों या हफ्तों तक लगातार सिरदर्द रहना, विशेषकर उल्टी या दृष्टि संबंधी समस्या के साथ  

• अचानक भ्रम की स्थिति या स्मरण शक्ति में अप्रत्याशित बदलाव  

 

विशेषज्ञों ने कहा कि मस्तिष्क का स्वास्थ्य हमारी दैनिक जीवनशैली से शुरू होता है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, तनाव पर नियंत्रण, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच तथा उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल का प्रभावी नियंत्रण अपनाकर तंत्रिका संबंधी अनेक गंभीर बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

विश्व मस्तिष्क दिवस के अवसर पर रामकृष्ण केयर अस्पताल ने लोगों से अपील की कि वे मस्तिष्क के स्वास्थ्य को भी हृदय के स्वास्थ्य जितनी ही प्राथमिकता दें। विशेषज्ञों ने कहा कि न्यूरोलॉजी और न्यूरो सर्जरी के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों ने उपचार की दिशा बदल दी है, लेकिन दिव्यांगता कम करने का सबसे प्रभावी उपाय आज भी यही है कि लोग शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचानें, बिना देरी उन्नत न्यूरो साइंस केंद्र तक पहुंचें और विशेषज्ञ उपचार प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि भारत में तंत्रिका संबंधी रोगों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए जनजागरूकता बढ़ाना और विशेषज्ञ सेवाओं तक समय पर पहुंच सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

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