RAIPUR : Tussle among officers even before Raipur Commissionerate
रायपुर, 18 जनवरी 2026। शहरी पुलिसिंग को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार 23 जनवरी से राजधानी में कमिश्नर व्यवस्था लागू करने जा रही है, लेकिन इसके शुरू होने से पहले ही पुलिस विभाग के भीतर असमंजस और संशय का माहौल बन गया है।
आईपीएस अधिकारियों के सामने एक तरह का “धर्म संकट” खड़ा हो गया है। रायपुर शहर के 22 पुलिस थाने प्रस्तावित पुलिस कमिश्नर के अधिकार क्षेत्र में होंगे, जबकि रायपुर देहात के 11 थाने और धमतरी, बलौदाबाजार, महासमुंद व गरियाबंद जिलों का प्रभार आईजी स्तर के अधिकारी के पास रहेगा। इससे अफसरों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या 22 थानों की कमिश्नरी, चार जिलों और 11 थानों के आईजी पद के बराबर मानी जा सकती है।
नवा रायपुर क्षेत्र को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। चर्चा है कि नवा रायपुर कमिश्नरेट के दायरे से बाहर रहेगा और देहात एसपी के अंतर्गत शामिल किया जाएगा। राजधानी के केवल शहरी क्षेत्र तक सीमित कमिश्नरी के कारण पुलिस कमिश्नर के प्रभाव और अधिकार कम होने की आशंका जताई जा रही है।
ज्वाइंट कमिश्नर पद को लेकर भी असंतोष है। डीआईजी रैंक के अधिकारी को यह पद दिया जाएगा, लेकिन कई डीआईजी बड़े और संवेदनशील जिलों में एसपी के रूप में स्वतंत्र प्रभार संभाल रहे हैं। उन्हें रायपुर कमिश्नरेट में एडिशनल एसपी जैसे कार्यभार वाले पद को स्वीकार करना पद और प्रभाव दोनों के लिहाज से पीछे जाना प्रतीत हो रहा है।
पुलिस कमिश्नर पद के लिए आईजी रैंक के अधिकारी की नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है। इस दौड़ में दुर्ग आईजी रामगोपाल गर्ग और बिलासपुर आईजी संजीव शुक्ला के नाम सबसे आगे हैं। रामगोपाल गर्ग सख्त और ईमानदार अधिकारी माने जाते हैं, जबकि संजीव शुक्ला राजधानी की भौगोलिक व सामाजिक परिस्थितियों से परिचित हैं।
ज्वाइंट कमिश्नर के लिए रायपुर की तासीर को समझने वाले अनुभवी डीआईजी की तैनाती का विचार किया जा रहा है। इसके लिए रायपुर एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह, एसआईबी में पदस्थ अजातशत्रु बहादुर सिंह, जशपुर एसपी शशि मोहन सिंह, बिलासपुर एसपी रजनेश सिंह और दुर्ग एसपी विजय अग्रवाल के नाम पर विचार चल रहा है।
कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने में महज पांच दिन बचे हैं, लेकिन गृह विभाग अब तक अधिसूचना जारी नहीं कर पाया है। विधि विभाग से हरी झंडी मिलने के बावजूद दंडाधिकार को लेकर आईएएस और आईपीएस लॉबी के बीच खींचतान जारी है। इस वजह से पुलिस कमिश्नर को मिलने वाले वास्तविक अधिकारों की तस्वीर अब तक साफ नहीं हो पाई है, जिससे राजधानी में कमिश्नर व्यवस्था की शुरुआत से पहले ही असमंजस गहराया हुआ है।
