पत्रकार – दीपक तिवारी
कवर्धा। भाजपा के अंदर सत्ता और संगठन के बीच की खींचतान अब खुले मंच पर दिखाई देने लगी है। पार्टी के जिला अध्यक्ष का नाम लगातार निमंत्रण पत्रों से गायब रहना और कार्यक्रमों में अनदेखी होना अब कार्यकर्ताओं के बीच गर्म चर्चा का विषय बन चुका है।
सूत्रों की मानें तो हाल के कई सरकारी आयोजनों में भाजपा संगठन के जिला अध्यक्ष को या तो बुलाया ही नहीं गया, और बुलाया भी गया तो उनका नाम निमंत्रण पत्र में ऐसे गायब हुआ जैसे नमक बिना दाल।
कार्यकर्ता सवाल पूछ रहे हैं — “क्या सत्ता में बैठे नेता अब संगठन से बड़े हो गए हैं?” पार्टी के भीतर यह पहली बार नहीं हुआ। कहा जा रहा है कि कुछ “सत्ताधारी चेहरे” खुद को संगठन से ऊपर समझ बैठे हैं, और जिला अध्यक्ष की अनदेखी को अपनी ताकत दिखाने का तरीका बना लिया है।
पार्टी सूत्र बताते हैं कि जिला अध्यक्ष ने इस मामले को लेकर प्रदेश नेतृत्व का ध्यान आकर्षित किया, लेकिन अभी तक “ऊपर” से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उधर कार्यकर्ता भी दबी जुबान में कह रहे हैं —
> “जब संगठन के मुखिया का सम्मान नहीं रहेगा, तो कार्यकर्ता किसके प्रति जवाबदेह रहेगा?”
राजनीतिक गलियारों में सवाल गूंज रहा है — क्या भाजपा में अब सत्ता का अहंकार संगठन पर हावी हो गया है? या फिर यह “संगठन बनाम सत्ता” का वही पुराना संघर्ष है, जो अब सार्वजनिक रूप ले चुका है?जो भी हो, जिले की राजनीति में इस मुद्दे ने तड़का लगा दिया है, और अब चर्चा हर चाय की दुकान पर एक ही है —👉 “भाजपा में अब कौन बड़ा — सत्ता या संगठन?”

