तिरछी नजर 👀 : रडार पर भाजपाई दिग्गज… ✒️✒️

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ईडी और आईटी की कार्रवाई के जवाब में सत्तारूढ़ कांग्रेस के हाथ महिला बैंक घोटाला लग गया है। ताज़ा अदालती आदेश के मद्देनज़र बड़े भाजपा नेताओं को घेरने की रणनीति बनायी गई है। बैंक मैनेजर रहे उमेश सिन्हा से 3 घंटे तक पुलिस पूछताछ हो चुकी है। सिन्हा ने नार्को टेस्ट में जो नाम उगले हैं, अगली कड़ी में उन दिग्गजों को पुलिस पूछताछ के लिए तलब कर सकती है। दिल्ली में बड़ी प्रेस कॉन्फ़्रेंस कराने की योजना है। पूरा माल-मसाला वहाँ पहुँचा दिया गया है। बड़े वकील माथापच्ची में जुटे हुए हैं। यानी ईडी कांग्रेस नेताओं पर शिकंजा कसेगी और राज्य पुलिस भाजपा नेताओं पर। चुनाव तक दोनों दलों के नेताओं की मुश्किलें कम नहीं होंगीं।

जीपी सिंह पर बर्खास्तगी की तलवार

राज्य सरकार ने निलंबित आईपीएस जीपी सिंह को जबरिया रिटायर करने का मन बना लिया है। इस सिलसिले में अनुशंसा केन्द्रीय गृहमंत्रालय को भेज दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कुछ महीने पहले जीपी सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी की थी। इसका भी जिक्र फाइल में किया गया है। हालांकि चर्चा है कि भाजपा के कई ताकतवर नेता उन्हें बचाने की कोशिश में भी लगे हैं। जीपी सिंह भी अपने खिलाफ दर्ज प्रकरणों की जांच सीबीआई से कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस पर भी सुनवाई चल रही है। इस माह प्रकरण पर फैसले की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में जीपी का क्या होगा, कुछ हद तक कोर्ट के फैसले पर भी निर्भर करेगा।

होनहार बेटे

भाजपा के दो बड़े नेता छगनलाल मुंदड़ा ‌और राजीव अग्रवाल के बेटे ने जिस धमाकेदार तरीके से भाजयुमो के जरिए सक्रिय राजनीति में एंट्री की है, उससे भाजपा के कई और बड़े नेता अपने बेटे- बेटियों को राजनीति में लाने की सोच रहे हैं।
छगन और राजीव के बेटे को आते ही भाजयुमो प्रदेश कार्यसमिति में जगह मिल गई। दोनों ने अपनी प्रतिभा भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या के आगमन के दौरान दिखा भी दिया। सूर्या को एयरपोर्ट से लाने के लिए महंगी लग्जरी गाड़ियों का काफिला लगा दिया। ये अलग बात है कि प्रदर्शन अपेक्षाकृत सफल नहीं रहा, लेकिन दोनों की मेहमान नवाज़ी की खूब चर्चा हो रही है।

बड़े दफ़्तर से कांपते रसूखदार..

क्या छत्तीसगढ़ में ईडी की कार्रवाई का दायरा बढऩे जा रहा है? दरअसल, ईडी के एक ताज़ा विज्ञापन के बाद कयास तेजी से लग रहे हैं। यह विज्ञापन बड़े दफ़्तर की तलाश के लिए जारी किया गया है। ईडी का मौजूदा दफ़्तर पचपेड़ी नाका स्थित पुजारी कांप्लेक्स में है। अब वह दफ़्तर छोटा पडऩे लगा है। इसलिए ईडी ने बड़े परिसर की तलाश तेज कर दी है। ऐसे में सुगबुगाहट है कि आने वाले दिनों में चुनाव के मद्देनजऱ कार्रवाई तेज होगी। यह भी पता चला है कि एक निगम-मंडल अध्यक्ष के बेटे के नाम पर राम मंदिर के पास एक बड़े व्यवसायिक परिसर में कई दुकानें हैै। आफिस सातवें माले में है जिसे जब्त कर खरीद- बिक्री पर रोक लगाने रजिस्ट्री आफिस को ईडी ने पत्र लिख दिया है। अब इसमें क्या होता है ,देखना है।

देवशयनि एकादशी की बधाई और गिरफ्तारी..

पंचायत विभाग के चर्चित अफसर अशोक चतुर्वेदी के गिरफ्तारी के बाद कई प्रकार के राजनीतिक कयास लग रहे हैं। सत्ता पक्ष व विपक्ष के नेताओं अफसरों के बीच गहरी पैठ और अंदरुनी रणनीति बनाने वाले अशोक इन दिनों अध्यात्म की तरफ चले गये थे। प्रदेश के कई जगहों पर उनके प्रवचन चलते रहे हैं। और जब भ्रष्टाचार के प्रकरण में उनके खिलाफ कार्रवाई पर रोक हटी, तो चुपचाप निकल गए। लेकिन वो सोशल मीडिया का मोह नहीं छोड़ पा रहे थे।
देवशयनि एकादशी की बधाई देने मोबाईल को ऑन किया, तो जांच एजेंसी को उनका लोकेशन मिल गया। फिर एक उनके करीबी से पूछताछ के बाद पुख्ता जानकारी मिल गई और गिरफ्तारी हो गई। अब इस मामले में करीबी राजनेता और अफसर क्या कदम उठाते हैं ,इसका आगामी दिनों में खुलासा होगा। वैसे कहा जा रहा है कि चतुर्वेदी के मोबाइल से काफी कुछ राज निकल सकते हैं।

तीन अक्षर के भाग्यशाली नेता कौन?

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री तीन अक्षर के नाम वाले नेता ही बन रहे हैं। प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी, दूसरे मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह और तीसरे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हैं। यही नहीं, भाजपा में महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस की वापसी का कयास ज्यादा लग रहे हैं। नेतृत्व के झगड़े में फंसे भाजपा में तीन अक्षर वाले और नेताओं को भी आगे करने की कोशिश हो रही है। दूसरी तरफ, कांग्रेस ने भूपेश बघेल के नेतृत्व में फिर से विधानसभा चुनाव लडऩे का ऐलान कर कांग्रेस के भीतर के कयास को खत्म करने का प्रयास किया है।

दागियों का बोलबाला

वन विभाग में पीसीसीएफ चीफ की नियुक्ति के बाद भी शिकवा शिकायत थम नहीं रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक वन विभाग की गतिविधियों की जानकारी अलग-अलग माध्यमों से पहुंचाई जा रही है।
बताते हैं कि कैम्पा में गड़बड़ी की सर्वाधिक शिकायतें आईं हैं।खास बात यह है कि पीसीसीएफ श्रीनिवास राव खुद कैम्पा के प्रभारी हैं। हाल यह है कि साफ छवि के अधिकारी भी फाईलों के निपटारे में रुचि नहीं ले रहे है। अरण्य भवन में आपसी समन्वय के अभाव के चलते चुनावी वर्ष में खराब छवि के अफसरों का बोलबाला बढ़ गया है।

 

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