‘आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों को मिलेगा सामान्य सीट का हक’, सुप्रीम कोर्ट ने का बड़ा फैसला

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि आरक्षित वर्ग के वे अभ्यर्थी जो सामान्य श्रेणी की कटआफ से अधिक अंक प्राप्त करते हैं, उन्हें अनारक्षित (जनरल) सीटों पर समायोजित किया जाना अनिवार्य है।

शीर्ष अदालत ने इसे स्थापित कानूनी सिद्धांत बताते हुए कहा कि मेरिट के आधार पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी का ही अभ्यर्थी माना जाएगा। यह निर्णय देशभर की भर्ती प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण नजीर साबित होगा।

न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने केरल हाई कोर्ट के 2020 के फैसले को निरस्त करते हुए यह टिप्पणी की। हाई कोर्ट ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआइ) को निर्देश दिया था कि वह मेधावी आरक्षित श्रेणी (एमआरसी) के उम्मीदवारों को सामान्य सूची से बाहर कर एक अनारक्षित अभ्यर्थी की नियुक्ति करे। सुप्रीम कोर्ट ने इस दृष्टिकोण को कानून के विपरीत करार दिया। फैसला लिखने वाले न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि “अनारक्षित श्रेणी सामान्य वर्ग का कोटा नहीं है, बल्कि यह एक खुला पूल है जहां केवल योग्यता के आधार पर चयन होता है।” अदालत ने इसे ‘मेरिट इंड्यूस्ड शिफ्ट’ बताते हुए कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के अनुरूप है, जो कानून के समक्ष समानता और सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर की गारंटी देते हैं।

कहां से उभरा विवाद

मामला 2013 में एएआइ द्वारा जूनियर असिस्टेंट (फायर सर्विस) के 245 पदों की भर्ती से जुड़ा था। चयन प्रक्रिया में 122 अनारक्षित सीटों पर सामान्य के साथ-साथ ओबीसी, एससी और एसटी के मेधावी उम्मीदवारों को शामिल किया गया था।

प्रतीक्षा सूची में 10वें स्थान पर रहे सामान्य वर्ग के उम्मीदवार श्याम कृष्ण बी ने इसे चुनौती दी थी और केरल हाई कोर्ट से राहत पा ली थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का फैसला पलटते हुए कहा कि एएआइ की प्रक्रिया पूरी तरह वैधानिक थी और मेरिट को दरकिनार कर नियुक्ति नहीं की जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट की शर्त उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी बिना किसी रियायत (जैसे आयु या शुल्क में छूट) का लाभ लिए सामान्य कटऑफ से अधिक अंक लाता है, तो उसे खुली श्रेणी में गिना जाएगा। इससे संबंधित आरक्षित कोटे की सीटें उसी वर्ग के अगले योग्य उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध बनी रहती हैं।

 

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