Kishtwar Cloudburst: किश्तवाड़/उधमपुर। मानसून की वर्षा इस बार किश्तवाड़ जिला में स्थित मां चंडी के घर के रास्ते में स्थित चशोती पर कहर बनकर टूटी हैं। मचैल चंडी माता मंदिर जाने वाले मार्ग पर भवन से आठ किलोमीटर की दूरी पर बसे चशोती गांव में गुरुवार दोपहर बादल फटने से ऐसा भयावह मंजर बना कि चारों ओर चीख-पुकार और बर्बादी का आलम फैल गया।
देखते ही देखते शांत पहाड़ मौत के सैलाब में बदल गए, जिसने घर, वाहन, लंगर और लोगों को बहा ले जाकर तबाही की एक दिल दहला देने वाली तस्वीर पेश कर दी। जानकारी के अनुसार दोपहर लगभग 12.30 बजे लगातार हो रही बारिश के बीच चशोती के ऊपरी पहाड़ों पर अचानक बादल फट गया।
कई घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त
इससे चशोती नाले में भयंकर बाढ़ अपने साथ मिट्टी और मलबा लेकर आ गई। जिसने पूरे गांव को दहशत में डाल दिया। आधा चशोती गांव इस तबाही की चपेट में आ गया। पानी के तेज बहाव में कई वाहन बह गए और बड़ी संख्या में लोग लापता हो गए। 12 घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए और कईयों को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा।
इसी दौरान मचैल माता के श्रद्धालुओं के लिए चशोती में लगाया गया एक लंगर भी पूरी तरह बर्बाद हो गया। बताया जा है कि यह लंगर उधमपुर के सैला तालाब क्षेत्र के लोगों द्वारा संचालित किया जा रहा था।
राहत और बचाव कार्य जारी
हादसे के बाद हालात इतने विकट हो गए कि अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, सैलाब आने से चशोती में तबाही मचने के बाद मचैल यात्रियों को मोटरसाइकिल पर ले जाने वाले स्थानीय चालक राहत और बचाव कार्य में सबसे पहले कूद पड़े। हादसे के वक्त वह चशोती पुल से करीब 200 मीटर दूर अपने स्टाप पर मौजूद थे। उन्होंने चालकों ने बिना समय गंवाए घायलों को पांच किलोमीटर दूर हमोरी लंगर तक पहुंचाया।
