IRAN ISRAEL WAR : The impact of the war! LPG in India is under threat
रायपुर। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की रसोई तक पहुंच सकता है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच टकराव गहराने के बाद भारत सरकार अलर्ट मोड में आ गई है। आशंका है कि अगर हालात और बिगड़े तो देश में रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है। निर्देश दिया गया है कि अब प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल मुख्य रूप से सिर्फ रसोई गैस बनाने में किया जाए, ताकि गैस सिलेंडर की सप्लाई में कोई रुकावट न आए।
सरकार ने यह भी कहा है कि रिफाइनरियां इन गैसों की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों को देंगी। इनमें इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम शामिल हैं। मकसद साफ है देश में LPG सिलेंडर की कमी किसी भी हाल में न हो।
संकट की सबसे बड़ी वजह ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ रूट पर खतरा बताया जा रहा है। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के करीब 20% पेट्रोलियम की सप्लाई होती है और भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी रूट से मंगाता है। युद्ध के माहौल में यहां से टैंकरों की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है।
उधर ईरान के ड्रोन हमले के बाद कतर के LNG प्लांट का प्रोडक्शन रुकने से भी चिंता बढ़ गई है। भारत अपनी करीब 40% LNG कतर से आयात करता है। अगर सप्लाई लंबी अवधि तक प्रभावित हुई तो गैस सेक्टर और CNG कंपनियों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में पेट्रोलियम और LPG का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घबराने की जरूरत नहीं है।

