CG HUMAN TRAFFICKING : पलायन बना मुसीबत! दो साल में 39 केस, महिलाएं-नाबालिग सबसे ज़्यादा शिकार

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CG HUMAN TRAFFICKING : Migration becomes a problem! 39 cases in two years, women and minors are the biggest victims

रायपुर, 30 जुलाई 2025। जब पूरा देश 30 जुलाई को मानव तस्करी के खिलाफ विश्व दिवस मना रहा था, उसी दिन छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में दो नन की गिरफ्तारी ने मानव तस्करी की भयावह सच्चाई को उजागर कर दिया। यह गिरफ़्तारी राज्य में मानव तस्करी के बढ़ते मामलों और जमीनी स्तर पर सक्रिय नेटवर्क की ओर गंभीर संकेत देती है।

आदिवासी और पिछड़े वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित –

जानकारों का कहना है कि छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिले जैसे – सरगुजा, जशपुर, कोरबा, बस्तर और बलरामपुर – मानव तस्करी के हॉटस्पॉट बने हुए हैं। यहां बेरोजगारी और पलायन के चलते तस्करों के लिए ग्रामीणों को बहलाना आसान हो जाता है।

अधिकतर पीड़ित नाबालिग लड़कियां और महिलाएं होती हैं, जिन्हें घरेलू नौकर, मजदूरी या यौन शोषण के लिए दूसरे राज्यों में भेजा जाता है।

पुलिस सक्रिय, लेकिन नेटवर्क अब भी मजबूत –

पुलिस और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की सक्रियता से कुछ हद तक पीड़ितों की वापसी और गिरफ्तारियां हुई हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में तस्करी एजेंट अब भी सक्रिय हैं।

अब तक के आंकड़े (जनवरी 2023 से फरवरी 2025 तक) :

वर्ष दर्ज प्रकरण कुल पीड़ित बरामद गिरफ्तार आरोपी
2023 22 46 45 47
2024 15 17 17 32
फरवरी 2025 02 03 03 04
कुल 39 66 65 83

छत्तीसगढ़ से पलायन भी बड़ा कारण

जनवरी 2024 से फरवरी 2025 के बीच राज्य से 63,000 से अधिक लोगों ने पलायन किया है। सबसे अधिक पलायन बलौदाबाजार (13,200) से हुआ, इसके अलावा जशपुर, कोरबा, मुंगेली, बिलासपुर, रायपुर, महासमुंद, खैरागढ़, कबीरधाम जैसे जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग कामकाज की तलाश में बाहर गए हैं।

क्या है जरूरत?

जमीनी स्तर पर सशक्त निगरानी

गांव-गांव में जागरूकता अभियान

पलायन रोकने के लिए स्थानीय रोजगार

स्कूल स्तर पर बालिकाओं को जागरूक करना

तस्करी के खिलाफ सख्त कानून और त्वरित कार्रवाई

 

 

 

 

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