गुप्त नवरात्रि में कैसे करें अपने ग्रहों को अनुकूल, पढ़े खबर

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रायपुर- 14 जून : गुप्त नवरात्रि, जो 26 जून 2025 से शुरू हो रही है (कुछ पंचांगों के अनुसार 25 जून की शाम से प्रतिपदा तिथि शुरू होने के कारण भ्रम हो सकता है, लेकिन उदयातिथि के आधार पर 26 जून मान्य है), मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की साधना और तांत्रिक पूजा के लिए विशेष महत्व रखती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस गुप्त नवरात्रि का क्या महत्व है और मां जगदम्बा की भक्ति से ग्रहों को अनुकूल करने और माता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित उपाय और विधियां अपनाई जा सकती हैं:

1. गुप्त नवरात्रि का महत्व और ग्रहों की अनुकूलता

गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के दस महाविद्या स्वरूपों (काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्तिका, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला) की पूजा होती है। ये स्वरूप ग्रहों के दोषों को दूर करने और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करने में सहायक हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, प्रत्येक महाविद्या कुछ ग्रहों से संबंधित होती है, और उनकी साधना से ग्रहों की अशुभता को कम किया जा सकता है।

सर्वार्थ सिद्धि योग (26 जून 2025): इस बार गुप्त नवरात्रि के पहले दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो पूजा, जप, और साधना के लिए अत्यंत शुभ है। इस योग में किए गए कार्य ग्रहों को अनुकूल करने में विशेष प्रभावी होते हैं।

ग्रहों का प्रभाव: ज्योतिष में माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान तांत्रिक साधना और मंत्र जाप से शनि, राहु, केतु जैसे क्रूर ग्रहों के दुष्प्रभाव कम होते हैं, जबकि सूर्य, चंद्र, और गुरु जैसे शुभ ग्रहों का प्रभाव बढ़ता है।

2. ग्रहों को अनुकूल करने के उपाय

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, गुप्त नवरात्रि में निम्नलिखित उपाय ग्रहों को अनुकूल करने में सहायक हैं:
(क) ग्रह-महाविद्या संबंध और मंत्र जाप

सूर्य: मां भुवनेश्वरी की साधना। मंत्र: ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः। 108 बार जाप करें। सूर्य की अशुभता (पितृ दोष, आत्मविश्वास की कमी) को दूर करने में सहायक।
चंद्र: मां त्रिपुर सुंदरी (षोडशी) की साधना। मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौः नमः। मानसिक शांति और चंद्र दोष (भावनात्मक अस्थिरता) के लिए।
मंगल: मां बगलामुखी की साधना। मंत्र: ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा। मंगल दोष और क्रोध नियंत्रण के लिए।
बुध: मां मातंगी की साधना। मंत्र: ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा। वाणी, बुद्धि, और व्यापार में सफलता के लिए।
गुरु: मां तारा की साधना। मंत्र: ॐ स्त्रीं ह्रीं तारायै नमः। गुरु की अशुभता (ज्ञान, धन हानि) को दूर करने के लिए।
शुक्र: मां कमला की साधना। मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः। वैवाहिक सुख और ऐश्वर्य के लिए।
शनि: मां काली की साधना। मंत्र: ॐ क्रीं कालिकायै नमः। शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, और दीर्घकालिक समस्याओं के लिए।
राहु: मां छिन्नमस्तिका की साधना। मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्रवैरोचन्यै हूं हूं फट् स्वाहा। राहु के भ्रम और बाधाओं को दूर करने के लिए।
केतु: मां धूमावती की साधना। मंत्र: ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट्। केतु के आध्यात्मिक और गूढ़ दोषों के लिए।

जाप विधि:

सुबह स्नान के बाद शुद्ध स्थान पर लाल या काले आसन पर बैठें।
दीपक जलाएं और माता की मूर्ति/चित्र के सामने मंत्र जाप करें।
प्रत्येक मंत्र का जाप कम से कम 108 बार (एक माला) करें।
गोपनीयता बनाए रखें, क्योंकि गुप्त नवरात्रि में साधना का प्रभाव गोपनीयता से बढ़ता है।

दान का समय: गुप्त नवरात्रि के दौरान सुबह सूर्योदय के समय या शुभ मुहूर्त में दान करें।
(ग) घटस्थापना और ग्रह शांति

घटस्थापना मुहूर्त: 26 जून 2025 को सुबह 5:12 से 7:43 तक या 4:44 से 6:58 तक।

मिट्टी के कलश में सप्तधान्य (सात प्रकार के अनाज) और जल भरकर मां दुर्गा का आह्वान करें।
लाल कपड़ा बिछाकर माता की मूर्ति/चित्र स्थापित करें। नवरात्रि के नौ दिन तक दीपक जलाएं।
ग्रह शांति के लिए प्रत्येक दिन नवग्रह मंत्र (ॐ नवग्रहाय नमः) का 108 बार जाप करें।
दुर्गा सप्तशती का पाठ करें, विशेष रूप से सिद्ध कुंजिका स्तोत्र और देवी कवच। यह ग्रहों के दोषों को दूर करता है।

मां जगदम्बा का आशीर्वाद प्राप्त करने की विधियां

मां जगदम्बा (दुर्गा) की कृपा प्राप्त करने के लिए गुप्त नवरात्रि में श्रद्धा, संयम, और गोपनीयता के साथ निम्नलिखित उपाय करें:
(क) पूजा विधि

सुबह की पूजा:
सूर्योदय से पहले स्नान करें और शुद्ध वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।
मां दुर्गा की मूर्ति/चित्र को लाल कपड़े पर स्थापित करें। लाल फूल, सिंदूर, और गुड़हल की माला अर्पित करें।
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) और नारियल चढ़ाएं।
दुर्गा बत्तीसी (देवी के 32 नाम) का जाप करें। यह सभी बाधाओं को दूर करता है।

प्रत्येक दिन अलग-अलग महाविद्या की पूजा करें:

दिन 1: मां काली – काले वस्त्र, तिल का भोग।
दिन 2: मां तारा – नीले फूल, खीर का भोग।
दिन 3: मां त्रिपुर सुंदरी – लाल वस्त्र, कमल पुष्प।
दिन 4: मां भुवनेश्वरी – पीले फूल, हल्दी चावल।
दिन 5: मां छिन्नमस्तिका – रक्त पुष्प, गुड़ का भोग।
दिन 6: मां त्रिपुर भैरवी – लाल चंदन, लड्डू।
दिन 7: मां धूमावती – काले तिल, सादा भोजन।
दिन 8: मां बगलामुखी – पीला वस्त्र, बेसन का हलवा।
दिन 9: मां मातंगी – हरे फूल, मालपुआ।
दिन 10: मां कमला – कमल पुष्प, खीर।

शाम की पूजा:
देसी घी का दीपक जलाएं और मां की आरती करें (जय अंबे गौरी या दुर्गा आरती)।
दुर्गा चालीसा या सप्तशती का पाठ करें।
भोग लगाएं और प्रसाद वितरित करें।

(ख) व्रत और संयम

नौ दिन का व्रत रखें। यदि पूर्ण उपवास संभव न हो, तो फलाहार या सात्विक भोजन करें।
लहसुन, प्याज, मांस, और मदिरा से परहेज करें।
ब्रह्मचर्य का पालन करें और क्रोध, ईर्ष्या जैसे नकारात्मक भावों से बचें।
गोपनीयता बनाए रखें; अपनी साधना को दूसरों से साझा न करें।

(ग) विशेष साधना

दुर्गा सप्तशती पाठ: प्रत्येक दिन एक अध्याय पढ़ें। नवमी पर सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें।
हवन: अष्टमी या नवमी तिथि पर हवन करें। हवन में ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का जाप करें और घी, लाल चंदन, और गुग्गुल की आहुति दें।
कन्या पूजन: नवमी तिथि पर 9 कन्याओं का पूजन करें। उन्हें भोजन, वस्त्र, और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें। यह मां जगदम्बा की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम तरीका है।

(घ) तांत्रिक और आध्यात्मिक उपाय

महाकाल साधना: उज्जैन में महाकाल, हरसिद्धि, और काल भैरव की साक्षी में साधना विशेष फलदायी होती है। घर पर भी मां काली की तस्वीर के सामने काले तिल और गुड़ का भोग लगाएं।

32 नामों का जाप: दुर्गा बत्तीसी का रोजाना पाठ करें। यह नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नजर, और आर्थिक संकट को दूर करता है।

ध्यान: प्रत्येक दिन 10-15 मिनट मां जगदम्बा के स्वरूप का ध्यान करें। यह आध्यात्मिक शक्ति और मानसिक शांति प्रदान करता है।

4. मां जगदम्बा की कृपा के लिए विशेष सुझाव

श्रद्धा और विश्वास: मां की पूजा पूर्ण श्रद्धा से करें। मन में संदेह न लाएं।
सात्विक जीवन: गुप्त नवरात्रि के दौरान सात्विक जीवनशैली अपनाएं। दान, सेवा, और गरीबों की मदद करें।
मंत्र सिद्धि: यदि आप किसी विशेष मंत्र की सिद्धि चाहते हैं, तो गुप्त नवरात्रि का समय इसके लिए सर्वोत्तम है। किसी गुरु या ज्योतिषी से मार्गदर्शन लें।
उज्जैन का महत्व: यदि संभव हो, उज्जैन में महाकाल मंदिर या हरसिद्धि मंदिर में दर्शन करें। यह साधना की सिद्धि के लिए विशेष शुभ है।

5. सावधानियां

गुप्त नवरात्रि की साधना में गोपनीयता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।
बिना गुरु मार्गदर्शन के तांत्रिक साधना न करें, क्योंकि यह जोखिम भरा हो सकता है।
किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता की गारंटी नहीं है। पूजा या उपाय करने से पहले ज्योतिषी या पंडित से सलाह लें

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