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क्रिकेट को अलविदा कह चुके हरभजन की राजनीति में होगी एंट्री? बोले- कई पार्टियों से मिले हैं ऑफर

नई दिल्ली : भारत के सबसे सफल गेंदबाजों में से एक हरभजन सिंह ने शुक्रवार को सभी तरह के क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की. हालांकि, इस फैसले के साथ ही उनके राजनीति में एंट्री को लेकर कयास लगने लगे. हालांकि, राजनीति को लेकर हरभजन ने कहा कि उनके पास कई दलों से ऑफर हैं लेकिन उन्होंने इसके बारे में अभी कुछ भी सोचा नहीं है. इससे पहले उनकी पंजाब कांग्रेस प्रमुख सिद्धू के साथ तस्वीर वायरल हुई थी जिसके बाद भी उनके कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें लगाई गई थीं.

राजनीति में शामिल होने के सवाल पर हरभजन सिंह ने एएनआई से कहा, ‘मैं हर पार्टी के राजनेताओं को जानता हूं. अगर मैं किसी पार्टी में शामिल होता हूं तो मैं पहले ही घोषणा कर दूंगा. पंजाब की सेवा करूंगा, शायद राजनीति से या कुछ और, अभी कोई फैसला नहीं हुआ है. मैंने अभी इस बारे में कुछ नहीं सोचा है. मुझे अलग-अलग पार्टियों से शामिल होने के ऑफर मिले हैं. मैंने नवजोत सिंह सिद्धू से बतौर क्रिकेटर मुलाकात की.’

हरभजन सिंह 23 साल तक क्रिकेट खेले. क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद हरभजन सिंह ने मंकीगेट की सच्चाई के बारे में बताया है. साल 2008 में सिडनी टेस्ट के दौरान हरभजन सिंह और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर एंड्रयू साइमंड्स के बीच विवाद हो गया था. जिसके बाद उसे मंकीगेट नाम दिया गया.

सिडनी टेस्ट में हुआ था विवाद
हरभजन सिंह और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व हरफनमौला एंड्रयू साइमंड्स के बीच गतिरोध ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब यह नस्लीय विवाद में बदल गया. टेस्ट मैच के आखिरी दिन ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन कप्तान रिकी पोंटिंग ने अंपायर स्टीव बकनर और मार्क बेन्सन से शिकायत की कि हरभजन ने साइमंड्स को ‘मंकी’ कहकर नस्लीय रूप से अपमानित किया है. सिडनी टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 122 रनों से हराया था. लेकिन मंकीगेट ऐसा विवाद था जिसकी लड़ाई कोर्ट रूम के अंतर लड़ी गई.

मंकीगेट की सच्चाई बताएंगे हरभजन
हरभजन सिंह ने इस घटना का खुलासा करते हुए कहा कि यह शायद उनके करियर का सबसे बड़ा निचला स्तर था. इस घटना के बारे में हरभजन ने कभी भी सार्वजनिक रूप से विस्तार से बात नहीं की. लेकिन 41 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर ने खुलासा किया है कि वह इस घटना की सच्चाई पेश करेंगे. समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, यह कुछ ऐसा था जिसकी आवश्यकता नहीं थी, सिडनी में उस दिन जो कुछ भी हुआ वह नहीं होना चाहिए था और यह भी कि इसके कारण क्या हुआ. यह वास्तव में अनावश्यक था. लेकिन भूल जाओ कि किसने क्या कहा. आप और मैं दोनों जानते हैं कि सत्य के दो पहलू हैं.

हरभजन सिंह ने कहा, पूरे प्रकरण में किसी ने भी सच्चाई के मेरे पक्ष की परवाह नहीं की, किसी को भी परवाह नहीं थी कि मैं उन कुछ हफ्तों में क्या कर रहा था और मैं मानसिक रूप से कैसे परेशान था, मैंने कभी भी कहानी के अपने पक्ष को व्यापक नहीं दिया है, लेकिन मेरी आने वाली आत्मकथा में लोगों को इसके बारे में पता चल जाएगा, जो मेरे साथ हुआ वह किसी के साथ नहीं होना चाहिए था.

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