दुर्योधन का कल्याण, जंगल में रहने में ही है, उसे ट्रेंकुलाइज करके वापस न लायें, गर्व करें वह जंगल चला गया है

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कुनकी हाथी दुर्योधन के जंगली हाथियों के दल में मिल जाने पर वन्य जीव प्रेमी ने मुख्य वन्यजीव संरक्षक से की मांग – ट्रेंकुलाइज करने से पहले लें सर्वोच्च न्यायालय की हाई पॉवर कमेटी से अनुमोदन

रायपुर। सरगुजा के एलीफैंट रिज़र्व में रामकोला स्थित हाथी राहत एवं पुनर्वास केंद्र में रखे गए कुनकी हाथी दुर्योधन को 8 दिनों पूर्व जब जंगल में घुमाने ले जाया गया था तब वह जंगली हाथियों से मिल गया तथा अभी तक रेस्क्यू सेंटर में वापस नहीं आया है। वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा दुर्योधन को जंगली हाथियों के दल में पहचान लिया गया है पर विशेषज्ञ उसे जंगली हाथियों से अलग नहीं कर पा रहे हैं। अधिकारी के हवाले से यह छपा है की दुर्योधन को अन्य कुनिकी हाथियों की मदद से अलग करने की कोशिश जा रही है, ट्रेंकुलाइज करना अंतिम विकल्प है। समाचार के अनुसार कानन पेंडारी जू के डॉक्टर पी.के.चन्दन को बुलाया गया है, इससे पता चलता है कि वन विभाग दुर्योधन को ट्रेंकुलाइज कर वापस लेन की तैयारी कर रहा है। इस पर दुर्योधन को ट्रेंकुलाइज न करने की मांग वन जीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने मुख्य वन्यजीव संरक्षक से करते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पॉवर कमेटी से ट्रेंकुलाइज करने के पूर्व अनुमति लेने की भी मांग की है।

दुर्योधन का कल्याण जंगल में रहने में ही है

मुख्य वन्यजीव संरक्षक को प्रेषित पत्र में कहा है कि दुर्योधन का कल्याण जंगल में रहने में ही है। उसे ट्रेंकुलाइज करके वापस लाने में उसकी जान को भी खतरा हो सकता है और आजीवन बंधक रहने में उसका किसी भी प्रकार का कल्याण नहीं होने वाला। उसे जबरदस्ती कुनिकी हाथियों की मदद से बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए। वन विभाग को वन्यप्राणीयों को पकड़ कर आजीवन बंधक बनाने की मानसिकता से ऊपर उठना चाहिए। गलत निर्णय से दुर्योधन की जान को कोई खतरा होता है तो मुख्य वन्यजीव संरक्षक जिम्मेदार होंगे।

छत्तीसगढ़ को गर्व होना चाहिए कि दुर्योधन ने प्रस्तुत किया देश में एक ज्वलंत उदाहरण

बंधक हाथी को कभी भी पालतू नहीं बनाया जा सकता। यहां तक कि बंधक हाथी के बच्चे को भी एक उम्र पश्चात वन में पुनर्वासित किया जा सकता है। हाथियों का मूल गुण जंगल में रहने का और स्वच्छंद विचरण करने का है। वर्षो से बंधक दुर्योधन ने वापस जंगली हाथियों के दल में शामिल हो कर देश में एक ज्वलंत उदाहरण प्रस्तुत किया है कि हम बंधक हाथियों को भी वन में पुनर्वासित कर सकते हैं। इस पर छत्तीसगढ़ वन विभाग को गर्व होना चाहिए। सिंघवी ने खेद जताया कि दुर्योधन को पकड़ कर वापस रेस्क्यू सेंटर में लाने के लिए ट्रेंकुलाइज करना अंतिम विकल्प रखा गया है और ट्रेंकुलाइज करने के लिए ही डॉ.चन्दन को बुलवाया गया है।

सोनू हाथी को भी छोड़ा जाना था

वर्ष 2016 में अचानकमार टाइगर रिज़र्व से पकडे गए सोनू हाथी के मामले में डॉ मेनन टी.एस. की सलाह मानते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भी सोनू को वन में पुनर्वासित करने का आदेश दिया था कि उसे ऐसे कैंप में रखा जाए जहां पर वह जंगली हाथियों से मिल जाए और धीरे-धीरे वापस जंगल में चला जाए कोर्ट ने यह कार्य कब किया जावे यह वन अधिकारियों की विसडम (बुद्धि) पर छोड़ा था आज तक सोनू को जंगल में पुनर्वासित करने का प्रयत्न नहीं किया गया है।

क्या है सर्वोच्च न्यायलय की हाई पॉवर कमेटी

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मूर्ति एम.एस. के मामले में 03 मार्च 2023 को दिए गए निर्णय में हाथियों और अन्य वन्यजीवों के संबंध में जस्टिस दीपक वर्मा की अध्यक्षता में हाई पावर कमेटी का गठन किया है। निर्णय में उल्लेखित है कि यह समिति किसी रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर द्वारा किसी जानवर के कल्याण के संबंध में अप्रूवल देगी, जिसके लिए हाई पावर कमिटी देश के किसी भी विभाग और प्राधिकरणों से आवश्यकता पड़ने पर सहायता और सहयोग ले सकती है। इसके अलावा समिति भारत में जंगली जानवरों के स्थानांतरण, परिवहन, आयात, या वन्यजीवों की खरीद या किसी बचाव या पुनर्वास केंद्र या चिड़ियाघर द्वारा जंगली जानवरों के कल्याण से संबंधित अनुमोदन, विवाद या शिकायत का निराकरण करेगी।

सिंघवी ने कहा कि दुर्योधन अपने आप वापस आ जाता है तो उसका स्वागत करना चाहिए परन्तु वापस आने के बाद भाग जाने के नाम से उसे कोई सजा नहीं दी जानी चाहिए।

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