कबीरधाम/संवाददाता : कबीरधाम जिले में अचानक आए चक्रवात ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया। तेज़ हवाओं और लगातार बारिश ने खेतों में लहलहाती धान की फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। जिन खेतों में कुछ दिन पहले तक सोना लहरा रहा था, आज वहां सिर्फ कीचड़, टूटे पौधे और मायूस चेहरे दिख रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में हालात इतने गंभीर हैं कि किसान अब आर्थिक संकट के दौर में पहुँच गए हैं। ज़्यादातर किसानों ने केसीसी (Kisan Credit Card) से लोन लेकर खेती की थी। अब जब फसल पूरी तरह चौपट हो गई है, तो उनके सामने कर्ज़ चुकाने और परिवार चलाने की दोहरी मार आ पड़ी है।

किसानों का कहना है कि इस बार की बर्बादी सिर्फ फसल की नहीं, बल्कि भविष्य की उम्मीदों की भी है। कुछ किसानों ने बताया कि वे लाखों रुपए का कर्ज़ चुका नहीं पा रहे हैं और बैंक नोटिस का डर सता रहा है ।
“हमने उम्मीदों का बीज बोया था, अब खेतों में सिर्फ निराशा उग आई है,” – यह कहना है ग्राम पथरिया के किसान रामकुमार साहू का, जिनकी 4 एकड़ की पूरी धान की फसल बर्बाद हो चुकी है ।
सरकारी सहायता का इंतज़ार:
ग्रामीण इलाकों में अभी तक कोई राहत शिविर या सर्वे टीम नहीं पहुँची है। किसानों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे कर राहत राशि और लोन माफी की घोषणा करे। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो कबीरधाम का कृषि तंत्र पूरी तरह चरमरा सकता है।
कुल मिलाकर, चक्रवात ने कबीरधाम के किसानों की जिंदगी में ऐसा तूफान ला दिया है, जिसकी मार आने वाले महीनों तक महसूस की जाएगी।

