TEACHER RECRUITMENT SCAM : शिक्षा विभाग ने मंत्री को सदन में दिलवाई गलत जानकारी

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TEACHER RECRUITMENT SCAM : Education Department provided false information to the Minister in the House

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2025 को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। शिक्षा विभाग के अफसरों ने विधानसभा को झूठी जानकारी भेजी, जिसका नतीजा यह हुआ कि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को सदन में गलत जवाब देना पड़ा। अब सवाल उठ रहा है कि यह सिर्फ टंकण त्रुटि थी या जानबूझकर किया गया खेल?

विधायक के सवाल से खुली पोल

कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने बिलासपुर जिले में सहायक शिक्षक संविदा भर्ती में कथित भ्रष्टाचार को लेकर विधानसभा में सीधा सवाल दागा था। उन्होंने पूछा था कि –

कितने पदों पर भर्ती हुई

विषयवार पदों की जानकारी

क्या विज्ञान पदों पर कॉमर्स/आर्ट्स के शिक्षक लगाए गए

शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई

भर्ती के प्रभारी अधिकारी कौन थे

मंत्री का जवाब और अफसरों की चाल

मंत्री की ओर से सदन में जवाब दिया गया कि विज्ञान विषय का उल्लेख विज्ञापन में “टंकण त्रुटि” से हुआ, और नियमों में विषय बाध्यता नहीं है। लेकिन यही जवाब अब अफसरों की सबसे बड़ी गलती साबित हो रहा है।

असली मामला: गोल्ड मेडलिस्ट बाहर, अपात्र अंदर

हकीकत इससे बिल्कुल उलट निकली।

जांच में सामने आया कि –

विज्ञान शिक्षक के पदों पर कॉमर्स और आर्ट्स के उम्मीदवारों की नियुक्ति की गई

योग्य और गोल्ड मेडलिस्ट उम्मीदवारों को बाहर कर दिया गया

नियम, मापदंड और शर्तों की खुली अनदेखी हुई

कलेक्टर के आदेश पर हुई जांच

शिकायतकर्ता कामिनी कौशिक ने कलेक्टर संजय अग्रवाल को लिखित शिकायत दी थी। कलेक्टर के निर्देश पर दो प्राचार्यों की जांच समिति बनाई गई, जिसने भर्ती में गंभीर गड़बड़ियों की पुष्टि कर दी।

जांच रिपोर्ट में क्या निकला?

जांच रिपोर्ट में साफ लिखा है –

हायर सेकेंडरी विज्ञान संकाय अनिवार्य था

चयनित उम्मीदवार कॉमर्स विषय से पास पाए गए

दस्तावेज सत्यापन और मेरिट सूची दोनों त्रुटिपूर्ण

चयन को गलत और नियम विरुद्ध ठहराया गया

बच्चों की पढ़ाई पर भी सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि

– क्या कॉमर्स और आर्ट्स के शिक्षक विज्ञान पढ़ाएंगे?
– क्या यह बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं है?

अफसरों पर कार्रवाई कब?

जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अगर समय रहते एक्शन नहीं लिया गया, तो बिलासपुर जिले की शिक्षा व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

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