CAG Report:रायपुर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने छत्तीसगढ़ के राज्य सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों और स्मार्ट सिटी मिशन के क्रियान्वयन में गंभीर खामियों को उजागर किया है। मार्च 2023 तक की अवधि के लिए तैयार ऑडिट रिपोर्ट को 16 दिसंबर 2025 को संविधान के अनुच्छेद 151 के तहत विधानसभा में पेश किया गया। रिपोर्ट में वित्तीय अनुशासन, कॉरपोरेट गवर्नेंस और परियोजना निष्पादन में व्यापक कमियों पर चिंता जताई गई है।
कैग की रिपोर्ट संख्या-5 (वर्ष 2025) के अनुसार, नवा रायपुर स्मार्ट सिटी में 84 प्रतिशत कार्य एक ही ठेकेदार को सौंप दिए गए, जिससे प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं। वहीं रायपुर, बिलासपुर और नवा रायपुर—तीनों स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में स्वीकृत ₹9,627.70 करोड़ के मुकाबले 2016-17 से 2022-23 के बीच मात्र 27 प्रतिशत लागत के कार्यादेश ही जारी हो पाए। मार्च 2023 तक केवल 62 प्रतिशत कार्य पूरे हुए और वास्तविक व्यय ₹1,213.12 करोड़ रहा।
ऑडिट में यह भी सामने आया कि कार्यादेश जारी करने में देरी, स्थल उपलब्ध कराने में विफलता, बार-बार कार्यक्षेत्र में बदलाव और कमजोर अनुबंध प्रबंधन के कारण प्रगति प्रभावित हुई। इसके चलते केंद्र सरकार के फंड में कटौती हुई और राज्य के मिलान अनुदान में भी कमी आई।
राज्य सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की स्थिति पर भी कैग ने गंभीर टिप्पणी की है। 28 उपक्रमों में से 47 खाते लंबित पाए गए, जिनमें कुछ छह साल तक अधूरे रहे। 10 उपक्रमों ने लाभ दर्ज किया, जबकि 7 को भारी घाटा हुआ। पांच प्रमुख उपक्रमों का संचयी घाटा ₹10,252.86 करोड़ तक पहुंच गया। कई उपक्रमों में बोर्ड बैठकें, स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति, ऑडिट समिति और सतर्कता तंत्र जैसे अनिवार्य प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
कैग ने सरकार को सिफारिश की है कि घाटे में चल रहे और निष्क्रिय उपक्रमों की त्वरित समीक्षा की जाए, खातों को समय पर अंतिम रूप दिया जाए, कॉरपोरेट गवर्नेंस को मजबूत किया जाए और स्मार्ट सिटी विशेष प्रयोजन वाहनों में पूर्णकालिक नेतृत्व की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि सार्वजनिक धन की सुरक्षा और शहरी विकास में सुधार हो सके।
