BJP-CONGRESS ALLIANCE : BJP-Congress together!
नई दिल्ली। क्या बीजेपी और कांग्रेस कभी साथ आ सकते हैं? आमतौर पर जवाब होगा नामुमकिन। लेकिन महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद में यही नामुमकिन हकीकत बन गया है। स्थानीय निकाय चुनाव में धुर विरोधी बीजेपी और कांग्रेस ने हाथ मिलाकर सत्ता बना ली है, जबकि एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना को बाहर कर दिया गया है।
अंबरनाथ नगर परिषद अध्यक्ष चुनाव में बीजेपी की तेजश्री करंजुले की जीत के साथ यह नया राजनीतिक समीकरण साफ हो गया। बीजेपी और कांग्रेस के इस अप्रत्याशित गठबंधन को “अंबरनाथ विकास अघाड़ी” नाम दिया गया है, जिसके पास स्पष्ट बहुमत है।
क्या है अंबरनाथ का पूरा गणित?
अंबरनाथ नगर परिषद में कुल 59 पार्षद हैं।
– शिवसेना (शिंदे) : 28 सीटें
– बीजेपी : 15 सीटें
– कांग्रेस : 12 सीटें
– एनसीपी (अजित पवार गुट) : 4 सीटें
शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद सत्ता से बाहर रह गई। बीजेपी ने दूसरे नंबर पर रहते हुए कांग्रेस से गठबंधन कर लिया और 31 पार्षदों के समर्थन से बहुमत हासिल कर लिया, जबकि बहुमत का आंकड़ा 30 है।
शिंदे गुट भड़का, बताया ‘अभद्र गठबंधन’
बीजेपी–कांग्रेस की इस जुगलबंदी से शिवसेना (शिंदे) खेमे में नाराजगी साफ दिख रही है। पार्टी के विधायक डॉ. बालाजी किनीकर ने इसे शिवसेना के साथ विश्वासघात बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस-मुक्त भारत की बात करने वाली बीजेपी का कांग्रेस के साथ सत्ता बनाना पीठ में छुरा घोंपने जैसा है।
बीजेपी का पलटवार
बीजेपी ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया है। बीजेपी उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने कहा कि शिंदे गुट के साथ सत्ता में बैठना ही असली अभद्र गठबंधन होता। उन्होंने दावा किया कि महायुति के तहत शिवसेना (शिंदे) से कई बार बातचीत की गई, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
महायुति में बढ़ा तनाव
अंबरनाथ में बने इस गठबंधन ने महाराष्ट्र की महायुति में नई दरार पैदा कर दी है। यह गठबंधन राजनीतिक मजबूरी है या सत्ता का खेल इस पर सियासी बयानबाजी तेज होती जा रही है। फिलहाल इतना तय है कि अंबरनाथ ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया सियासी ट्विस्ट दे दिया है।

