CHHATTISGARH : Big relief for tribal villagers
बिलासपुर. बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जो सुदूर गांवों और आदिवासी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत बन सकता है। कोर्ट ने साफ कहा कि कम पढ़े-लिखे और दूरदराज के लोग अपने केस के लिए पूरी तरह वकीलों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में सिर्फ देरी होने के आधार पर उन्हें न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता।
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मामला बलरामपुर-रामानुजगंज के 7 ग्रामीणों का है, जिनके खिलाफ बेदखली की कार्रवाई हुई थी। कमिश्नर कोर्ट के फैसले के करीब 7 महीने बाद उन्होंने राजस्व मंडल में पुनरीक्षण याचिका लगाई, लेकिन देरी का हवाला देकर उसे खारिज कर दिया गया।
ग्रामीणों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और बताया कि वे आदिवासी, गरीब और निरक्षर हैं। उन्हें फैसले की जानकारी तब मिली जब प्रशासन मकान तोड़ने पहुंचा। इसके बाद उन्होंने तुरंत दस्तावेज निकालकर याचिका दायर की।
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हाईकोर्ट ने माना कि न्याय का उद्देश्य तकनीकी आधार पर लोगों का हक छीनना नहीं है। अदालत ने राजस्व मंडल का आदेश रद्द करते हुए मामला दोबारा सुनवाई के लिए वापस भेज दिया और सभी पक्षों को सुनकर गुण-दोष के आधार पर फैसला करने के निर्देश दिए।
