CG BEO OFFICE SCAM : Peon embezzled Rs 29 lakh!
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर से शिक्षा विभाग का बड़ा घोटाला सामने आया है। कोटा ब्लॉक के बीईओ कार्यालय में दो बीईओ और एक चपरासी ने मिलकर सरकारी खजाने को करीब 29.62 लाख रुपये का चूना लगा दिया। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल सिर्फ 15 महीनों में हुआ।
जांच में सामने आया कि कार्यालय में पदस्थ चपरासी देवेंद्र कुमार पालके पिछले कई सालों से वेतन बिल बनाने का काम देख रहा था। दो-दो बीईओ ने उसे ही आहरण एवं संवितरण अधिकारी की तरह पूरी छूट दे दी थी। इसी का फायदा उठाकर उसने खुद ही वेतन बनाया, अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल किया और बिल पास कराकर सरकारी खजाने से लाखों रुपये निकाल लिए।
जांच के मुताबिक चपरासी ने अपने खाते में हर महीने करीब 4 लाख 95 हजार रुपये वेतन के नाम पर और 3 लाख 54 हजार रुपये वर्दी धुलाई भत्ते के नाम पर निकाल लिए। नवंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच उसने करीब 25.04 लाख रुपये निकाल लिए, जबकि मार्च 2025 से नवंबर 2025 के बीच फिर 4.57 लाख रुपये और हड़प लिए।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब संचालनालय कोष, लेखा एवं पेंशन ने डेटा की रैंडम जांच की। जांच में पाया गया कि एक चपरासी के वेतन में अचानक असामान्य बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद विस्तृत जांच में फर्जीवाड़े का पूरा खेल खुल गया।
बताया जा रहा है कि आरोपी चपरासी कैश बुक और बिल रजिस्टर में कम राशि दर्ज करता था, जबकि बैंक खाते में ज्यादा रकम ट्रांसफर करता था। इतना ही नहीं, वह अपना फॉर्म-16 भी खुद ही तैयार कर लेता था और कभी कार्यालय में जमा नहीं करता था।
इस घोटाले के दौरान कोटा के बीईओ रहे विजय तांडे वर्तमान में बिलासपुर जिले के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) हैं। वरिष्ठ कोषालय अधिकारी ने उनके खिलाफ भी कार्रवाई की अनुशंसा की है। इसके अलावा वर्तमान बीईओ नरेंद्र मिश्रा और लेखा शाखा प्रभारी नवल सिंह पैकरा भी जांच के घेरे में हैं।
पूरे मामले में पुलिस ने वित्तीय अनियमितता और दस्तावेजों से छेड़छाड़ समेत कई धाराओं में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग में इस घोटाले के सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है और अब सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी गड़बड़ी इतने लंबे समय तक आखिर कैसे चलती रही।

